शुक्रवार के ट्रेडिंग सेशन में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **95.81** पर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और Reserve Bank of India (RBI) की सक्रिय दखलंदाजी ने रुपये को ग्लोबल दबाव के बीच मजबूती दी है।
रुपये को मिला सपोर्ट
शुक्रवार को भारतीय रुपया 95.81 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछली क्लोजिंग 95.96 के मुकाबले एक मामूली रिकवरी है। इस मजबूती के पीछे मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों का कम होना और RBI का समय पर बाजार में उतरना रहा। चूंकि भारत बड़ी मात्रा में क्रूड ऑयल का आयात करता है, इसलिए तेल के दाम घटने से डॉलर की मांग में कमी आती है, जो रुपये के लिए राहत की बात है।
RBI की 'एक्शन' रणनीति
पूरे हफ्ते बाजार में रही अस्थिरता को थामने के लिए केंद्रीय बैंक ने कड़ी निगरानी रखी। RBI ने करेंसी मार्केट में सीधे हस्तक्षेप के अलावा 'सेल-बाय स्वैप' (Sell-Buy Swaps) जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया। इन टूल्स के जरिए बैंक सिस्टम में लिक्विडिटी को नियंत्रित करता है, ताकि करेंसी में अचानक बड़ी गिरावट न आए।
फॉरवर्ड प्रीमियम में इजाफा
RBI के इन उपायों का एक असर फॉरवर्ड प्रीमियम (Forward Premium) में बढ़ोतरी के रूप में दिखा है। एक साल की फॉरवर्ड यील्ड बढ़कर 3.50% के स्तर पर पहुंच गई है, जो मई के बाद का उच्चतम स्तर है। इसका सीधा मतलब यह है कि एक्सपोर्ट-इंपोर्ट करने वाली कंपनियों के लिए डॉलर के रेट में भविष्य के बदलावों से बचाव (Hedging) करना अब और महंगा हो गया है।
आगे की राह चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि दुनियाभर में बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है और महंगाई रोकने के लिए कई केंद्रीय बैंक सख्त रुख अपना रहे हैं। फिलहाल, निवेशकों की नजर इस पर टिकी है कि क्या RBI आगे भी इसी तरह करेंसी को स्टेबल रखने के लिए कदम उठाता रहेगा या नहीं।
