RBI ने अगस्त में महंगाई दर के **4.82%** पर पहुंचने के बाद पॉलिसी को सख्त करने के संकेत दिए हैं। फिक्स्ड-इनकम निवेशकों को अब बॉन्ड की कीमतों में गिरावट का जोखिम झेलना पड़ सकता है, क्योंकि बढ़ती ब्याज दरें सीधे तौर पर बॉन्ड वैल्यू को प्रभावित करती हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अब मौद्रिक नीति में बदलाव का इशारा दिया है। नरम रुख के बाद अब बैंक सतर्क और सख्त रुख अपना सकता है। इसका मुख्य कारण हालिया महंगाई के आंकड़े हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 4.82% हो गई है, जो जुलाई में 4.45% थी। जानकारों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही तक यह 5.9% तक जा सकती है, जो मौजूदा 5.25% के रेपो रेट पर दबाव डाल सकती है।\n\n### बॉन्ड कीमतों पर क्यों पड़ता है असर?\n\nजब केंद्रीय बैंक महंगाई को थामने के लिए रेपो रेट बढ़ाता है, तो नई बॉन्ड यील्ड बढ़ जाती हैं। इसका सीधा मतलब है कि पुराने बॉन्ड, जो कम ब्याज दरें दे रहे थे, उनकी मार्केट वैल्यू गिर जाती है। लंबी अवधि के बॉन्ड पर यह गिरावट और भी ज्यादा असर डालती है।\n\n### पोर्टफोलियो में कैसे करें बदलाव?\n\nइस जोखिम को कम करने के लिए निवेशक अब अपनी होल्डिंग का मैच्योरिटी प्रोफाइल छोटा कर रहे हैं। लिक्विड फंड्स या मनी मार्केट फंड्स जैसे शॉर्ट-टर्म साधनों में पैसा लगाना ज्यादा सुरक्षित माना जा रहा है, क्योंकि ये ब्याज दरों में बदलाव के प्रति कम संवेदनशील होते हैं।\n\n### डायनेमिक बॉन्ड फंड्स की अहमियत\n\nनिवेशकों का ध्यान अब डायनेमिक बॉन्ड फंड्स की ओर बढ़ रहा है। ये फंड मैनेजर को बाजार की स्थिति के हिसाब से पोर्टफोलियो की अवधि (duration) को सक्रिय रूप से बदलने की आजादी देते हैं। अगर दरों के बढ़ने का अनुमान हो, तो मैनेजर मैच्योरिटी कम कर सकते हैं, जिससे रिस्क को बेहतर ढंग से मैनेज किया जा सकता है।\n\n### आगे क्या देखना जरूरी है?\n\nनिवेशकों को अब RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग के मिनट्स पर नजर रखनी चाहिए। महंगाई का यह उछाल अस्थायी है या स्थायी, यह आने वाले CPI डेटा से साफ हो जाएगा, जिसके आधार पर RBI अपनी आगे की कार्रवाई तय करेगा।
