RBI ने NRI निवेशकों को अपने FCNR(B) अकाउंट्स में भारत में रहने वाले रिश्तेदारों (Resident Relatives) को जोड़ने की अनुमति दी है। हालांकि, इसमें फंड्स के इस्तेमाल को लेकर 'फॉर्मर या सर्वाइवर' (Former or Survivor) का कड़ा नियम लागू किया गया है।
नियम और शर्तें: 'फॉर्मर या सर्वाइवर' का गणित
RBI की गाइडलाइन्स के अनुसार, FCNR(B) अकाउंट में NRI को 'फॉर्मर' (Primary Holder) और रेजिडेंट रिलेटिव को 'सर्वाइवर' (Survivor) के रूप में नामित किया जाता है। इसका मतलब यह है कि जब तक मुख्य खाताधारक जीवित है, तब तक रेजिडेंट रिलेटिव को अकाउंट ऑपरेट करने का स्वतंत्र अधिकार नहीं होगा। सामान्य जॉइंट अकाउंट के विपरीत, वे न तो पैसे निकाल सकते हैं और न ही जमा कर सकते हैं।
पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) की अहमियत
यदि NRI चाहते हैं कि भारत में रहने वाला उनका रिश्तेदार अकाउंट का प्रबंधन करे, तो उन्हें एक लीगल 'पावर ऑफ अटॉर्नी' (PoA) बनवाना होगा। बिना रजिस्टर्ड PoA के, रिश्तेदार की भूमिका केवल उत्तराधिकार (Succession) के लिए सीमित रहती है। मुख्य खाताधारक की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु की स्थिति में, नामित रिश्तेदार आसानी से फंड्स क्लेम कर सकते हैं, जिससे कानूनी दांव-पेंच और प्रोबेट (Probate) के लंबे प्रोसेस से बचा जा सकता है।
कौन बन सकता है जॉइंट होल्डर?
RBI ने 'रिलेटिव' की परिभाषा को Companies Act, 2013 के तहत रखा है। इसमें जीवनसाथी, भाई-बहन, माता-पिता और बच्चे ही शामिल हैं। दोस्तों या बिजनेस पार्टनर्स को इस लिस्ट से बाहर रखा गया है। इसके अलावा, FEMA नियमों के तहत, डिपॉजिट के लिए फंड्स केवल वैध NRI सोर्सेज से ही आने चाहिए।
निवेश के समय ये बातें रखें ध्यान
FCNR(B) अकाउंट्स मुख्य रूप से USD, GBP, EUR, और JPY जैसी विदेशी मुद्राओं में रखे जाते हैं, जो रुपये के उतार-चढ़ाव (Depreciation) से सुरक्षा का एक अच्छा माध्यम हैं। किसी भी बदलाव से पहले अपनी बैंक की गाइडलाइन्स जरूर चेक करें, क्योंकि बैंकों की आंतरिक पॉलिसी और PoA के प्रारूप अलग-अलग हो सकते हैं।
