7 अक्टूबर, 2026 को Reserve Bank of India ने रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी कर इसे **5.50%** कर दिया है। हालांकि, भारी FCNR डिपॉजिट के चलते बैंकों को फिलहाल फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) दरों को बढ़ाने की तुरंत जरूरत नहीं पड़ेगी।
RBI ने 7 अक्टूबर, 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा किया है। इस फैसले के बाद बैंक फिलहाल रिटेल डिपॉजिटर्स के लिए ब्याज दरें नहीं बढ़ाएंगे। इसकी मुख्य वजह अगस्त अंत तक जमा हुई लगभग USD 127 बिलियन की FCNR (Foreign Currency Non-Resident) डिपॉजिट्स हैं, जिसने बैंकों को एक बड़ा लिक्विडिटी बफर दिया है।\n\n### लोन रीप्राइसिंग का असर\n\nभले ही FD रेट्स अगले 2 से 3 महीने तक स्थिर रहें, लेकिन कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। बैंकों का एक बड़ा लोन पोर्टफोलियो रेपो रेट से लिंक्ड है। प्राइवेट बैंकों के करीब 91% और पब्लिक सेक्टर बैंकों के 54% लोन फ्लोटिंग रेट्स पर हैं, जो अब तुरंत महंगे हो जाएंगे। बैंकों को फायदा यह है कि वे पुरानी दरों पर डिपॉजिट चुका रहे हैं, जबकि लोन पर उन्हें अब ज्यादा ब्याज मिलेगा।\n\n### मार्जिन पर दबाव और भविष्य का आउटलुक\n\nजानकारों के मुताबिक, बैंकों पर 10 से 20 बेसिस पॉइंट्स का अस्थायी मार्जिन दबाव रह सकता है क्योंकि FCNR फंड्स का पूरा इस्तेमाल अभी नहीं हुआ है। दिसंबर 2026 तक लिक्विडिटी के न्यूट्रल होने की उम्मीद है, जिसके बाद बैंकों को फंडिंग के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं।\n\n### किन जोखिमों पर रखें नजर?\n\nपश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और एनर्जी प्राइसेज में उतार-चढ़ाव से बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। निवेशकों को सलाह है कि वे आगामी तिमाही नतीजों के दौरान मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखें, ताकि यह समझ सकें कि बैंक अपनी लिक्विडिटी को कैसे मैनेज कर रहे हैं।
