RBI ने रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी कर इसे **5.50%** कर दिया है। इस फैसले के साथ ही आसान लोन वाला दौर खत्म हो गया है और अब 'कैललिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) का दौर शुरू हो गया है।
RBI ने 7 अक्टूबर 2026 को ब्याज दरों में कटौती के लंबे दौर पर विराम लगाते हुए रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा किया है। पिछले 18 महीनों से, यानी फरवरी 2025 से सितंबर 2026 तक, छात्रों और छोटे व्यापारियों ने गिरती ब्याज दरों का खूब फायदा उठाया था, क्योंकि इस दौरान रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई थी।
कर्ज की महंगी शुरुआत
उस दौर में जब बड़ी कंपनियों की ओर से लोन की मांग कम थी, तब बैंकों ने रिटेल और MSME सेक्टर में काफी आक्रामक रुख अपनाया था। इसी वजह से एजुकेशन लोन और छोटे व्यवसायों के लोन पर ब्याज दरें काफी कम हो गई थीं। अब जबकि RBI ने अपना रुख बदल लिया है, तो उधार लेने वालों के लिए ब्याज दरें बढ़ना तय है।
आपके लोन पर क्या असर होगा?
ज्यादातर रिटेल लोन, जैसे कि एजुकेशन या बिजनेस लोन, EBLR (External Benchmark Lending Rate) या MCLR से जुड़े होते हैं। रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर इन बेंचमार्क्स पर पड़ता है, जिससे आपकी मौजूदा लोन की EMI या तो बढ़ जाएगी या फिर लोन का टेन्योर (Tenure) लंबा हो जाएगा।
बैंकों के लिए चुनौती
बाजार के जानकारों का कहना है कि अब बैंक इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि वे बढ़ती दरों का कितना बोझ ग्राहकों पर डालते हैं। हालांकि बैंकों का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) सुधर सकता है, लेकिन अगर लोन की मांग में कमी आती है, तो बैंकों को अपनी क्रेडिट ग्रोथ को लेकर सतर्क होना पड़ेगा। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि बैंक कितनी तेजी से डिपॉजिट रेट्स बढ़ाते हैं, क्योंकि उसी के आधार पर आगे का रास्ता तय होगा।
