RBI का बड़ा फैसला! अब डिजिटल फ्रॉड के नुकसान में बैंक और RBI भी देंगे हर्जाना, ग्राहकों को मिलेगी सुरक्षा

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का बड़ा फैसला! अब डिजिटल फ्रॉड के नुकसान में बैंक और RBI भी देंगे हर्जाना, ग्राहकों को मिलेगी सुरक्षा
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) छोटे-मोटे डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड (digital banking fraud) के मामलों में ग्राहकों को राहत देने के लिए एक नया ढांचा (framework) लेकर आया है। इसके तहत, अब फ्रॉड होने पर होने वाले नुकसान का हर्जाना सिर्फ ग्राहक या उसके बैंक को ही नहीं उठाना पड़ेगा, बल्कि RBI, ग्राहक के बैंक और पैसा जिस बैंक में पहुंचा है (beneficiary bank), वे सब मिलकर इस हर्जाने की भरपाई करेंगे। इसका मुख्य मकसद ग्राहकों की सुरक्षा बढ़ाना और सभी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को डिजिटल फ्रॉड रोकने के लिए ज्यादा सतर्क करना है। ये ड्राफ्ट नियम 1 जुलाई, 2026 तक अंतिम रूप ले लेंगे।

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डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड के लगातार बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। RBI ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत छोटे-मोटे डिजिटल फ्रॉड में होने वाले नुकसान का बोझ अब सिर्फ ग्राहक पर नहीं रहेगा। इस नए नियम के तहत, RBI खुद, ग्राहक जिस बैंक का इस्तेमाल करता है (customer's bank) और जिस बैंक में फ्रॉड का पैसा ट्रांसफर हुआ है (beneficiary bank), ये तीनों मिलकर हर्जाना बांटेंगे। यह व्यवस्था ग्राहकों को ज़्यादा सुरक्षा देने के साथ-साथ वित्तीय संस्थानों को फ्रॉड से निपटने के लिए और ज़्यादा चुस्त-दुरुस्त बनाएगी।

इस नए ढांचे का सबसे अहम हिस्सा है 'साझा दायित्व' (shared liability)। प्रस्ताव के मुताबिक, ₹50,000 तक के छोटे फ्रॉड में, ₹25,000 तक का हर्जाना RBI, ग्राहक के बैंक और बेनिफिशियरी बैंक मिलकर देंगे। इससे बैंकों पर अपनी सुरक्षा व्यवस्था (security protocols) को मजबूत करने का सीधा दबाव पड़ेगा। उन्हें फ्रॉड का पता लगाने वाली टेक्नोलॉजी (fraud detection technology) और कस्टमर एजुकेशन पर और ज्यादा पैसा खर्च करना होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि हालिया आंकड़े बताते हैं कि 2025 में भारत में डिजिटल फ्रॉड की घटनाओं में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। अनुमान है कि 2025 तक भारत में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड से होने वाले नुकसान $20 बिलियन के पार जा सकते हैं, और इसमें UPI ट्रांजैक्शन का बड़ा हाथ है।

हालांकि यह ग्राहकों के लिए अच्छी खबर है, लेकिन बैंकों की कमाई पर इसका असर दिख सकता है। खासकर उन बैंकों पर जिनका ग्राहक आधार बड़ा है या जिनकी सुरक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं है। कुछ फाइनेंशियल एनालिस्ट्स का मानना है कि अगर फ्रॉड के मामले कम नहीं हुए, तो कुछ बड़े पब्लिक सेक्टर बैंकों के नेट प्रॉफिट मार्जिन (net profit margins) में 0.5% से 1.5% तक की कमी आ सकती है। इस स्थिति से निपटने के लिए बैंकों को AI-पावर्ड फ्रॉड डिटेक्शन (AI-powered fraud detection) जैसी तकनीकों में भारी निवेश करना पड़ सकता है। साथ ही, ₹500 से ऊपर के हर ट्रांजैक्शन के लिए तुरंत SMS अलर्ट (SMS alerts) भेजने की अनिवार्यता भी बैंकों के IT और मैसेजिंग खर्च (messaging costs) को बढ़ाएगी।

इस पूरी प्रक्रिया में ग्राहक की जिम्मेदारी भी तय की गई है। ग्राहक को फ्रॉड होने के 5 दिन के अंदर नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal) और अपने बैंक, दोनों जगह शिकायत दर्ज करानी होगी। 2025 में इस पोर्टल पर दर्ज साइबर अपराधों में 60% से ज़्यादा मामले वित्तीय फ्रॉड से जुड़े थे। हालांकि, ग्राहकों को तुरंत हर्जाना मिले, इसके लिए बैंकों को अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं (internal processes) को और तेज करना होगा, क्योंकि ग्राहक बैंक और बेनिफिशियरी बैंक के बीच जिम्मेदारी तय करने में वक्त लग सकता है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फरवरी 2026 में मॉनेटरी पॉलिसी रिव्यू के दौरान संकेत दिया था कि इस नए नियम को 2026 के मध्य तक लागू करने का लक्ष्य है, और इसके फाइनल नियम 1 जुलाई, 2026 तक आ जाएंगे। यह कदम भारत के डिजिटल फाइनेंस रेगुलेशन (digital finance regulation) के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। RBI ने पिछले एक दशक में ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे 2015 में ₹2,000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन के लिए OTP की अनिवार्यता। इस नए नियम से डिजिटल बैंकिंग में ग्राहकों का भरोसा और मजबूत होगा, और बैंकों के बीच बेहतर सुरक्षा सुविधाएँ देने की होड़ भी बढ़ेगी।

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