भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है, जिसके तहत नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियों (NBFCs) को अब सिर्फ टर्म लोन देने की अनुमति होगी। इससे रिवॉल्विंग क्रेडिट प्रोडक्ट्स जैसे कि ओवरड्राफ्ट या क्रेडिट लाइन की सुविधा खत्म हो जाएगी। हालांकि, क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियों को इस नियम से छूट मिली है।
RBI का नया प्रस्ताव: NBFCs के लिए बदलेंगे नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त, 2026 को एक ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया है, जिससे नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनियों (NBFCs) के कर्ज देने के तरीके में बड़ा बदलाव आ सकता है। इस प्रस्ताव के अनुसार, NBFCs को भविष्य में केवल 'टर्म लोन' की सुविधा देनी होगी। इसका मतलब है कि ग्राहकों को बार-बार इस्तेमाल करने की सुविधा वाले 'रिवॉल्विंग क्रेडिट' प्रोडक्ट्स, जैसे कि ओवरड्राफ्ट या फ्लेक्सी-कैश लोन, उपलब्ध नहीं होंगे।
टर्म लोन और रिवॉल्विंग क्रेडिट में क्या है अंतर?
RBI के ड्राफ्ट के मुताबिक, 'टर्म लोन' एक निश्चित राशि का कर्ज होता है जिसे एक तय शेड्यूल के अनुसार किश्तों में चुकाया जाता है। एक बार पैसा निकल जाने और ईएमआई शुरू होने के बाद, ग्राहक उस लिमिट को फिर से इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसके विपरीत, 'रिवॉल्विंग क्रेडिट' में ग्राहक एक निश्चित लिमिट तक पैसा निकाल सकते हैं, उसे चुका सकते हैं और फिर से इस्तेमाल कर सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड कंपनियों को मिलेगी राहत
इस प्रस्ताव में एक बड़ी छूट क्रेडिट कार्ड जारी करने वाली कंपनियों के लिए है। SBI Cards और BoB Cards जैसी कंपनियां, जिनके पास क्रेडिट कार्ड जारी करने का लाइसेंस है, वे अपने बिजनेस को पहले की तरह जारी रख सकेंगी। क्रेडिट कार्ड का स्वभाव ही रिवॉल्विंग होता है, इसलिए उन्हें इस नियम से बाहर रखा गया है।
NBFCs और निवेशकों पर क्या होगा असर?
जो NBFCs पर्सनल लोन या डिजिटल लेंडिंग ऐप्स के जरिए रिवॉल्विंग क्रेडिट स्ट्रक्चर पर काम करती हैं, उन्हें अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में बदलाव करना पड़ सकता है। निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण डेवलपमेंट है, क्योंकि इससे इन कंपनियों के बिजनेस मॉडल, ग्राहक अधिग्रहण की रणनीति और लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर असर पड़ सकता है। नए नियमों के अनुसार सिस्टम अपडेट करने और डॉक्यूमेंटेशन तैयार करने में अतिरिक्त खर्च भी आ सकता है।
आगे क्या?
RBI ने इस ड्राफ्ट पर 28 अगस्त, 2026 तक आम जनता से सुझाव मांगे हैं। अंतिम नियम जारी होने के तुरंत बाद ये लागू हो सकते हैं। इसलिए, मार्केट पार्टिसिपेंट्स और निवेशक NBFCs के मैनेजमेंट की कमेंट्री पर बारीकी से नजर रखेंगे कि वे इन प्रस्तावित बदलावों के अनुसार कैसे ढलेंगे।
