RBI ने साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। अब **₹1,000** से ज्यादा के संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर AI आधारित मॉनिटरिंग होगी और ग्राहकों को सफाई देने के लिए **20 दिन** का समय मिलेगा।
नियम क्यों बदले जा रहे हैं?
यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त, 2026 के आदेश के बाद उठाया गया है, जिसका मकसद पूरे बैंकिंग सेक्टर में एकरूपता लाना है। RBI ने इस ड्राफ्ट पर 2 अक्टूबर तक पब्लिक से राय मांगी है और इसे 1 अप्रैल, 2027 से पूरी तरह लागू करने की योजना है।
क्या होगा नया सिस्टम?
बैंकों को अब आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करना होगा। अगर कोई ट्रांजैक्शन ₹1,000 या उससे ज्यादा है और ग्राहक की सामान्य स्पेंडिंग प्रोफाइल से मेल नहीं खाता, तो उसे फ्रॉड के तौर पर फ्लैग किया जाएगा। जब बैंक खाते पर डेबिट होल्ड (Debit Hold) लगाएगा, तो उसे तुरंत ग्राहक को सूचित करना होगा। इसके बाद, ग्राहक को 20 दिन का समय मिलेगा ताकि वह अपनी स्थिति साफ कर सके या बचाव में जवाब दे सके।
बैंकों के सामने चुनौतियां
पूरे अकाउंट को फ्रीज करने को अब एक 'एक्सट्रीम मेजर' माना जाएगा। बैंकों को संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देनी होगी। इस बदलाव के लिए बैंकों को अपने इंटरनल मॉनिटरिंग सिस्टम को अपग्रेड करना होगा, जिससे आने वाली तिमाहियों में बैंकों का ऑपरेशनल खर्च बढ़ सकता है। अगर AI गलत तरीके से वैध ट्रांजैक्शंस को ब्लॉक करता है, तो बैंकों की साख पर भी असर पड़ सकता है।
