RBI के नए नियम: विदेशी निवेश में बड़ी राहत, ₹250,000 तक के गिफ्ट संभव

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI के नए नियम: विदेशी निवेश में बड़ी राहत, ₹250,000 तक के गिफ्ट संभव

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी निवेश को आसान बनाने के लिए एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पेश किया है। इस नए नियम के तहत, रिश्तेदारों को भेजे जाने वाले विदेशी गिफ्ट की सीमा को बढ़ाकर **$250,000** कर दिया गया है।

Detailed Coverage

विदेशी निवेश के नियमों में बड़ा बदलाव

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में विदेशी निवेश के माहौल को आधुनिक बनाने के लिए एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। इस प्रस्तावित Foreign Exchange Management (Foreign Investment) Rules, 2026 का मकसद 2019 के मौजूदा Non-Debt Instruments Rules को बदलना है। एक सिद्धांत-आधारित दृष्टिकोण अपनाकर, RBI विदेशी पूंजी के देश में आने और उसके प्रवाह को नियंत्रित करने वाले जटिल नियमों को सरल बनाना चाहता है।

गिफ्ट भेजने और 'कंट्रोल' की परिभाषा में अहम बदलाव

इस प्रस्ताव की एक बड़ी खासियत यह है कि करीबी रिश्तेदारों को भेजे जा सकने वाले repatriable गिफ्ट की सीमा में भारी वृद्धि की गई है। यह सीमा पहले के $50,000 से बढ़ाकर $250,000 कर दी गई है, जो Liberalised Remittance Scheme (LRS) की सीमा के बराबर है। इससे परिवारों के बीच वित्तीय हस्तांतरण में काफी सहूलियत होगी।

इसके अलावा, ड्राफ्ट में Foreign Exchange Management Act (FEMA) के तहत 'कंट्रोल' की एक स्पष्ट परिभाषा भी दी गई है। अब कोई भी निवेशक जो अकेले या मिलकर 10% या उससे अधिक वोटिंग अधिकार रखता है, या प्रबंधन और नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करने की शक्ति रखता है, उसे किसी कंपनी का नियंत्रक माना जाएगा। इस मानकीकरण से नियामकों को डाउनस्ट्रीम निवेशों को बेहतर ढंग से ट्रैक करने में मदद मिलेगी, खासकर उन कंपनियों में जिनका विदेशी नियंत्रण है।

निवेश प्रोसेसिंग में रणनीतिक बदलाव

यह नया ढांचा इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स के लिए अकाउंटिंग-आधारित मानकों की ओर भी बढ़ रहा है, जिससे आने वाले निवेशों को प्रोसेस करना आसान होने की उम्मीद है। प्रस्ताव में स्पेशल पर्पस व्हीकल्स (SPVs) से जुड़े इक्विटी स्वैप्स और डायरेक्ट इंटरनेशनल लिस्टिंग के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, RBI ने अंतरिक्ष (space) और बीमा जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में सेक्टरल कैप को उदार बनाने का भी सुझाव दिया है। नियमों में Foreign Portfolio Investment (FPI) की सीमा पार करने पर निवेशों को पुनर्वर्गीकृत करने की स्पष्ट प्रक्रियाएं भी परिभाषित की गई हैं।

बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए, ड्राफ्ट RBI और Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन भी रेखांकित करता है। इस व्यवस्था के तहत, RBI विदेशी मुद्रा के परिचालन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा, जबकि DPIIT नीतिगत व्याख्या का नेतृत्व करेगा। यह कदम सरकार द्वारा गठित एक समिति द्वारा की गई समीक्षा के बाद उठाया गया है, जिसका पहली बार यूनियन बजट 2026-27 में उल्लेख किया गया था।

निवेशकों और कॉर्पोरेट संस्थाओं को इन नियमों की अंतिम अधिसूचना पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि ये विदेशी नियंत्रण वाली भारतीय कंपनियों के लिए अनुपालन आवश्यकताओं को प्रभावित कर सकती हैं। इसका प्रभाव अंतिम कार्यान्वयन समय-सीमा और मौजूदा कॉर्पोरेट संरचनाएं 'कंट्रोल' की नई परिभाषा और अपडेटेड सेक्टरल सीमाओं के अनुसार कैसे समायोजित होती हैं, इस पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.