RBI का बड़ा ऐलान! डिजिटल वॉलेट्स पर कसेगा शिकंजा, जानिए नए नियम

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का बड़ा ऐलान! डिजिटल वॉलेट्स पर कसेगा शिकंजा, जानिए नए नियम
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) के लिए नए नियम जारी किए हैं। इन नए नियमों के तहत, अब डिजिटल वॉलेट और कार्ड जारी करने वाली कंपनियों को कई सख्त परिचालन, अनुपालन और ग्राहक सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा।

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रेगुलेटरी कैपिटल की जरूरतें

RBI ने साफ किया है कि नॉन-बैंक एंटिटीज को पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर के तौर पर काम करने के लिए अब पहले से कहीं ज्यादा कैपिटल लगानी होगी। नए ऑथराइजेशन के लिए कम से कम ₹5 करोड़ का नेट वर्थ (Net Worth) जरूरी होगा। इसके साथ ही, ऑथराइजेशन मिलने के तीन साल के भीतर इस नेट वर्थ को बढ़ाकर ₹15 करोड़ करना होगा। यह कदम डिजिटल पेमेंट ऑपरेटर्स के बीच फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (Financial Stability) को बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

ट्रांजैक्शन और बैलेंस की नई लिमिट्स

अपडेटेड फ्रेमवर्क के तहत प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPIs) पर बैलेंस और ट्रांजैक्शन की लिमिट्स को और टाइट कर दिया गया है। अब फुल-केवाईसी (KYC) वाले PPIs में ₹2 लाख तक का आउटस्टैंडिंग बैलेंस मेंटेन किया जा सकता है, जिसके साथ मंथली डेबिट लिमिट भी तय होगी। पीयर-टू-पीयर (Peer-to-peer) फंड ट्रांसफर के लिए ₹25,000 प्रति माह की सीमा तय की गई है। इसके अलावा, PPIs में कैश लोडिंग (Cash Loading) को हर ट्रांजैक्शन पर ₹10,000 तक सीमित कर दिया गया है।

स्मॉल PPIs पर सख्ती

जिन स्मॉल PPIs के लिए मिनिमल KYC की जरूरत होती है, उन पर सख्त नियंत्रण बना रहेगा। इन इंस्ट्रूमेंट्स में ₹10,000 का बैलेंस कैप जारी रहेगा। खास बात यह है कि इनमें किसी भी तरह के फंड ट्रांसफर या विड्रॉल (Withdrawal) की सुविधा नहीं मिलेगी, जिससे इनका इस्तेमाल सिर्फ बेसिक ट्रांजैक्शन तक ही सीमित रहेगा।

इंटरऑपरेबिलिटी और इस्तेमाल

फुल-केवाईसी PPIs के लिए इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) को अनिवार्य बना दिया गया है। इसे कार्ड नेटवर्क (Card Networks) या यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए संभव बनाया जाएगा। RBI का मकसद यह है कि यूजर्स विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से ट्रांजैक्शन कर सकें, जिससे यूजर एक्सपीरियंस बेहतर हो। हालांकि, इन नए नियमों के तहत PPIs के क्रॉस-बॉर्डर यूसेज (Cross-border Usage) की अनुमति नहीं दी गई है।

ग्राहक सुरक्षा के उपाय

ग्राहक सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। सभी चार्जेस (Charges) और टर्म्स एंड कंडीशंस (Terms and Conditions) को स्पष्ट रूप से सामने डिस्क्लोज (Disclose) करना होगा। ग्रीवेंस रिड्रेसल (Grievance Redressal) के लिए एक मजबूत मैकेनिज्म बनाए रखना होगा। साथ ही, सभी PPI इश्यूअर्स को RBI की इंटीग्रेटेड ओम्बुड्समैन स्कीम (Integrated Ombudsman Scheme) का पालन करना होगा। रिफंड (Refund) के मामलों में, राशि तुरंत ग्राहक के PPI में क्रेडिट की जाएगी, भले ही वह अस्थायी रूप से स्थापित बैलेंस लिमिट से अधिक हो जाए।

ऑपरेशनल सुरक्षा

ऑपरेशनल इंटीग्रिटी (Operational Integrity) सुनिश्चित करने के लिए, नॉन-बैंक इश्यूअर्स को डेडिकेटेड एस्क्रो अकाउंट्स (Escrow Accounts) मेंटेन करने होंगे। ये अकाउंट्स शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंक (Scheduled Commercial Banks) के साथ रखे जाएंगे और डेली बेसिस पर बैलेंस और आउटस्टैंडिंग लायबिलिटीज (Liabilities) का रिकंसिलिएशन (Reconciliation) सुनिश्चित करेंगे। डीएक्टिवेशन (Deactivation) के लिए भी प्रक्रिया स्पष्ट की गई है: PPIs को एक साल की इनएक्टिविटी (Inactivity) के बाद डीएक्टिवेट कर दिया जाएगा और एक और साल तक रिएक्टिवेट न होने पर बंद कर दिया जाएगा, बचे हुए बैलेंस सोर्स अकाउंट (Source Account) में वापस कर दिए जाएंगे।

यह व्यापक अपडेट सेंट्रल बैंक के एक स्टैंडर्डाइज्ड और सुरक्षित डिजिटल पेमेंट सिस्टम के निर्माण के लक्ष्य को दर्शाता है। रिस्क कंट्रोल्स और ऑपरेशनल स्ट्रेंथ में सुधार करके, RBI भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल इकोनॉमी में इनोवेशन (Innovation) और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी (Financial Stability) के बीच संतुलन बनाना चाहता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.