RBI ने खोला बैंकिंग की पहुंच का नया रास्ता
RBI ने पिछले दिनों अपने बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) मॉडल को नया रूप देने का प्रस्ताव दिया है। इस बदलाव का सीधा असर देश के उन लाखों लोगों पर पड़ेगा, जिन्हें अब तक बैंकिंग सेवाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा था। इस नई संरचना के जरिए RBI यह सुनिश्चित करना चाहती है कि आखिरी व्यक्ति तक बैंकिंग सेवाएं आसानी से पहुंच सकें।
नई सेवा वितरण व्यवस्था: ब्रांचेज से लेकर टचपॉइंट्स तक
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, अब बैंकिंग सेवाएं तीन मुख्य जगहों से मिलेंगी:
- बैंक ब्रांचेज: ये पारंपरिक बैंक शाखाएं होंगी।
- BC-बैंकिंग आउटलेट्स (BC-BOs): ये एक फिक्स्ड पॉइंट वाले सर्विस यूनिट होंगे, जिन्हें BC या उसका सब-एजेंट चलाएगा। ये आउटलेट बैंक ब्रांच जैसी ही सेवाएं देंगे और इन्हें हर दिन कम से कम 4 घंटे और हफ्ते में 5 दिन खुला रखना होगा।
- BC-बैंकिंग टचपॉइंट्स (BC-BTs): ये अधिक लचीले (flexible) होंगे, जिनके लिए कोई तय सेवा घंटे नहीं होंगे।
खास बात यह है कि BC-BOs और BC-BTs केवल एक ही बैंक के साथ काम कर पाएंगे, जिससे सर्विस पर फोकस बना रहेगा।
पेमेंट में बदलाव, ग्राहक संतुष्टि पर जोर
RBI ने BCs को मिलने वाले पेमेंट (Remuneration) के तरीके में भी बड़ा बदलाव करने का सुझाव दिया है। BC-BOs और उनके सब-एजेंट्स को अब फिक्स्ड (Fixed) और वेरिएबल (Variable) दोनों तरह के कंपोनेंट्स से पेमेंट मिलेगा। वहीं, BC-BTs को केवल वेरिएबल पेमेंट दिया जाएगा।
एक महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब पेमेंट सिर्फ ट्रांजेक्शन वॉल्यूम (Transaction Volume) के आधार पर नहीं होगा, बल्कि कस्टमर सैटिस्फैक्शन (Customer Satisfaction) को भी पेमेंट का हिस्सा बनाया जाएगा। इसके लिए इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) को एक स्टैंडर्डाइज्ड मंथली रेमुनरेशन स्ट्रक्चर (Standardized Monthly Remuneration Structure) बनाने को कहा गया है।
गांवों में घटती BC आउटलेट्स की चिंता
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब RBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, गांवों में BC आउटलेट्स की संख्या में गिरावट देखी गई है। FY24 में 15.48 लाख आउटलेट्स थे, जो FY25 में घटकर 13.11 लाख रह गए। RBI की कोशिश है कि इस नई संरचना से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बैंकिंग सेवाओं का नेटवर्क फिर से मजबूत हो।
नई नियुक्तियों में सख्ती
RBI ने यह भी साफ किया है कि नए BCs की नियुक्ति से पहले उनकी मार्केट स्टैंडिंग, फाइनेंशियल स्ट्रेंथ, गवर्नेंस, कैश हैंडलिंग क्षमता और टेक्नोलॉजी अपनाने की योग्यता जैसी बातों की गहन जांच (Due Diligence) की जाएगी।
फिनटेक से मुकाबला और सेक्टर की सेहत
यह पहल फिनटेक (Fintech) कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच आई है, जो तेजी से ग्रामीण भारत में अपनी डिजिटल सेवाएं फैला रही हैं। हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल लिटरेसी की कमी जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं। अच्छी बात यह है कि भारतीय बैंकिंग सेक्टर मजबूत स्थिति में है, जिसका ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेशियो सितंबर 2025 तक घटकर 2.1% पर आ गया है, जो एक दशक का सबसे निचला स्तर है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) का P/E रेश्यो करीब 10.5, HDFC बैंक का 15.0 और ICICI बैंक का भी लगभग 15.0 है।
आगे की राह
RBI ने इस मसौदे पर जनता की राय 5 मई तक मांगी है, जिसके बाद इन नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितने प्रभावी ढंग से BC नेटवर्क को फिर से सक्रिय कर पाता है और ग्राहकों को बेहतर बैंकिंग अनुभव दे पाता है।