RBI का बड़ा कदम: NRI के लिए डॉलर FCNR(B) डिपॉजिट पर खास स्वैप विंडो, 2026 तक खुला

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का बड़ा कदम: NRI के लिए डॉलर FCNR(B) डिपॉजिट पर खास स्वैप विंडो, 2026 तक खुला

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) के लिए एक खास फॉरेन करेंसी स्वैप विंडो खोली है। यह विंडो यूएस डॉलर वाले FCNR(B) डिपॉजिट्स के लिए है और 30 सितंबर, 2026 तक मान्य रहेगी। इसका मकसद भारतीय बैंकों में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाना है।

क्या है RBI की नई पहल?

RBI ने फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक (FCNR(B)) डिपॉजिट्स के लिए एक नई स्वैप विंडो शुरू की है, जो खासकर यूएस डॉलर में जमा राशि पर लागू होगी। यह सुविधा 30 सितंबर, 2026 तक बुक होने वाले डिपॉजिट्स के लिए उपलब्ध रहेगी। इस स्वैप मैकेनिज्म के ज़रिए, RBI का लक्ष्य NRIs को भारतीय बैंकों में अपनी बचत जमा करने के लिए प्रोत्साहित करके देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना है।

बैंकों का खास ऑफर और शर्तें

इस ऐलान के बाद, कई पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर के बैंकों ने FCNR(B) डिपॉजिट्स के लिए खास इंटरेस्ट रेट स्ट्रक्चर पेश करना शुरू कर दिया है। ये ऑफर आम तौर पर 3 से 5 साल की अवधि को कवर करते हैं। कुछ बैंकों ने इन खास रेट्स का लाभ उठाने के लिए न्यूनतम ₹5 लाख की डिपॉजिट राशि की शर्त रखी है। हालांकि यह स्पेशल स्वैप फैसिलिटी सिर्फ यूएस डॉलर से रुपए में कन्वर्जन के लिए है, बैंक ब्रिटिश पाउंड, यूरो, जापानी येन, कैनेडियन डॉलर, ऑस्ट्रेलियन डॉलर, न्यूजीलैंड डॉलर, स्विस फ्रैंक और सिंगापुर डॉलर जैसी अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में भी FCNR(B) डिपॉजिट स्वीकार कर रहे हैं।

निवेशकों के लिए फायदे

FCNR(B) डिपॉजिट्स निवेशकों को खास टैक्स फायदे देते हैं। इन अकाउंट्स से होने वाली इंटरेस्ट इनकम भारत में इनकम टैक्स से पूरी तरह मुक्त है। इसके अलावा, मूल राशि (प्रिंसिपल) और ब्याज, दोनों को पूरी तरह से बाहर भेजा जा सकता है (fully repatriable), जिससे डिपॉजिटर्स को अपने फंड को मूल विदेशी मुद्रा में वापस विदेशी अकाउंट्स में ट्रांसफर करने की सहूलियत मिलती है। इन अकाउंट्स में जॉइंट होल्डिंग और नॉमिनेशन की सुविधा भी उपलब्ध है।

अकाउंट खोलने में देरी: एक बड़ी चुनौती

इन डिपॉजिट्स की आकर्षक ब्याज दरों के बावजूद, कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी हैं। भले ही ब्याज दरें आकर्षक हों, लेकिन विदेश से FCNR(B) अकाउंट खोलने की प्रक्रिया अभी भी काफी समय लेने वाली है। नए डिपॉजिटर्स को अक्सर 1 से 8 हफ्तों तक का इंतजार करना पड़ सकता है। यह देरी पेपर-आधारित वेरिफिकेशन, पहचान की जांच और विदेशी आवेदकों के लिए रेगुलेटरी KYC आवश्यकताओं के कारण होती है। कई बैंक अभी भी अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए इस एक्टिवेशन प्रोसेस को पूरी तरह से डिजिटाइज़ करने में संघर्ष कर रहे हैं।

लिक्विडिटी और लॉक-इन पीरियड

जो निवेशक इन डिपॉजिट्स का लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें लिक्विडिटी की शर्तों पर भी ध्यान देना चाहिए। हालांकि समय से पहले निकासी (premature withdrawal) की अनुमति है, यह आम तौर पर डिपॉजिट के पहले साल के बाद ही प्रतिबंधित होती है। FCNR(B) टेन्योर में आमतौर पर 3 से 5 साल की डिपॉजिट के लिए एक साल का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड होता है, और यदि फंड्स मूल अवधि पूरी होने से पहले निकाले जाते हैं तो ब्याज दर में बदलाव किया जा सकता है। भविष्य में, यह कदम बैंकों की लिक्विडिटी बढ़ाने में कितना प्रभावी होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि लेंडर (बैंक) NRI आवेदकों के लिए मौजूदा कई हफ्तों के वेटिंग टाइम को कम करने के लिए अपने डिजिटल ऑनबोर्डिंग प्रोसेस को कितनी जल्दी सुव्यवस्थित कर पाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.