Reserve Bank of India (RBI) ने सरकारी तेल कंपनियों यानी Indian Oil, HPCL और BPCL के लिए **12 अक्टूबर, 2026** से डॉलर-सेलिंग सुविधा शुरू करने का ऐलान किया है। इससे बाजार में रुपये पर दबाव कम होगा और विदेशी मुद्रा की मांग में स्थिरता आएगी।
डॉलर की मांग और रुपये पर दबाव
भारत की सरकारी तेल कंपनियां देश के सबसे बड़े कच्चे तेल के आयातकों में से एक हैं। अब तक ये कंपनियां खुले बाजार (Open Market) से डॉलर खरीदती थीं, जिससे बाजार में अचानक डॉलर की मांग बढ़ने पर रुपये की वैल्यू में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता था। RBI की इस नई व्यवस्था से यह 'लंपी डिमांड' (अचानक बड़ी मांग) बाजार से हट जाएगी, जिससे करेंसी मार्केट में बेहतर स्थिरता आने की उम्मीद है।
क्रूड ऑयल का संकट और असर
सितंबर 2026 में क्रूड ऑयल की कीमतें $116 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई थीं, जिसने तेल कंपनियों के लिए आयात बिल बढ़ा दिया है। रुपया पहले ही डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तरों के आसपास ट्रेड कर रहा है। ऐसे में RBI का यह कदम कंपनियों के लिए डॉलर की उपलब्धता को आसान बनाएगा, जिससे वे बिना किसी पैनिक के अपने प्रोक्योरमेंट ऑपरेशंस संभाल सकेंगी।
इकोनॉमी का मौजूदा माहौल
हालांकि यह कदम आयातकों को स्थिरता देगा, लेकिन ग्लोबल लेवल पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उठापटक अभी भी एक बड़ा रिस्क है। इसके अलावा, महंगाई को काबू में रखने के लिए RBI ने 7 अक्टूबर, 2026 को रेपो रेट को 5.50% पर एडजस्ट किया है। निवेशकों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि डॉलर की यह नई विंडो फॉरेक्स लिक्विडिटी को किस तरह प्रभावित करती है।
