RBI की NRI जमा योजना से ₹65 अरब का रिकॉर्ड कलेक्शन! देश के फॉरेन रिजर्व में जबरदस्त उछाल

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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI की NRI जमा योजना से ₹65 अरब का रिकॉर्ड कलेक्शन! देश के फॉरेन रिजर्व में जबरदस्त उछाल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की फॉरेन करेंसी जमा योजना ने कमाल कर दिया है! इस खास विंडो के जरिए देश में **$65 अरब** से ज्यादा की विदेशी मुद्रा आई है, जिससे देश का बाहरी सेक्टर मजबूत हुआ है। यह 2013 के कलेक्शन से काफी ज्यादा है और FY27 के लिए भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) को बेहतर बना रहा है।

Detailed Coverage

RBI की स्कीम से कितना आया पैसा?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) या FCNR(B) डिपॉजिट्स के जरिए विदेशी मुद्रा जुटाने की कोशिशें रंग लाई हैं। लेटेस्ट अनुमानों के मुताबिक, भारतीय बैंकों ने इस खास विंडो से $65 अरब से $70 अरब तक की रकम जमा की है। यह 2013 की वैसी ही स्कीम से जुटाए गए $26 अरब से कहीं ज्यादा है। इससे साफ है कि इस बार विदेशी डिपॉजिटर्स ने कहीं ज्यादा दिलचस्पी दिखाई है।

भारत की बाहरी स्थिरता पर असर

डॉलर के इस बड़े इनफ्लो (inflow) से भारत के बाहरी सेक्टर को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। SBI रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, बैंक की उधारी (bank borrowings) और एक्सटर्नल कमर्शियल बोरिंग्स (External Commercial Borrowings) को मिलाकर कुल फॉरेन करेंसी इनफ्लो $80 अरब से $85 अरब तक पहुंच सकता है। इस भारी-भरकम पूंजी के आने से 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) का आउटलुक काफी बदल गया है। जहां पहले $65 अरब से $70 अरब के डेफिसिट (deficit) का अनुमान था, वहीं अब $50 अरब से ज्यादा का सरप्लस (surplus) देखने की उम्मीद है।

फिलहाल, सरकारी बैंकों (Public Sector Banks) ने इस कलेक्शन में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। ये बैंक अपने ग्लोबल नेटवर्क और नॉन-रेजिडेंट भारतीयों (NRIs) के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल करके यह पैसा जुटा रहे हैं। यह कोशिश देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) को GDP के 1 से 1.2% के दायरे में रखने के लिए बेहद अहम है।

करेंसी रिस्क और आगे क्या?

रिजर्व्स (Reserves) बढ़ने के बावजूद, रुपये की वैल्यू को लेकर कुछ चिंताएं बनी हुई हैं। एनालिस्ट्स का कहना है कि रुपये का लगातार गिरना एक चुनौती पेश कर रहा है। यह खतरा है कि जब यह स्पेशल डिपॉजिट विंडो 30 सितंबर, 2026 को बंद हो जाएगी, तो रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है। निवेशकों और मार्केट पर नजर रखने वालों के लिए, इस तारीख के बाद RBI की करेंसी की अस्थिरता (volatility) को मैनेज करने की काबिलियत पर कड़ी नजर रखनी होगी।

एक अलग डेवलपमेंट में, सरकार ने करेंसी सर्कुलेशन को मॉडर्नाइज (modernize) करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। RBI को पॉलीमर-बेस्ड (polymer-based) नोट्स के फील्ड ट्रायल (field trials) करने की मंजूरी मिल गई है। शुरुआत में, ₹10 और ₹20 के एक-एक अरब पीस जारी किए जाएंगे। ये नोट्स पारंपरिक पेपर करेंसी की तुलना में ज्यादा टिकाऊ (durable) बनाए गए हैं, और अगर ये सफल होते हैं, तो भविष्य में इन्हें बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकता है ताकि कैश सिस्टम की कॉस्ट-एफिशिएंसी (cost-efficiency) में सुधार हो सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.