RBI का बैंकों को कड़ा फरमान: डिजिटल फेल्योर अब 'सिस्टमैटिक रिस्क', बोर्ड की जिम्मेदारी तय

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI का बैंकों को कड़ा फरमान: डिजिटल फेल्योर अब 'सिस्टमैटिक रिस्क', बोर्ड की जिम्मेदारी तय

RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने बैंकों को चेतावनी दी है कि टेक्नोलॉजी में खामियां अब एक बड़ा सिस्टेमैटिक रिस्क बन गई हैं। अब बैंकों के बोर्ड को साइबर सिक्योरिटी और डिजिटल रेजिलिएंस पर खास फोकस करना होगा, जिसका असर आने वाली तिमाहियों में बैंक के ऑपरेटिंग खर्चों पर दिख सकता है।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने भारतीय बैंकों के लिए एक स्पष्ट संदेश जारी किया है: टेक्नोलॉजी में आई कोई भी गड़बड़ी अब सिर्फ एक तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर सिस्टेमैटिक रिस्क है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बैंकिंग कॉन्क्लेव में उन्होंने साफ कहा कि किसी भी बैंक की ऑपरेशनल स्थिरता उसके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर टिकी है। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि टेक्नोलॉजी अब सिर्फ सपोर्ट फंक्शन नहीं, बल्कि बैंक की फाइनेंशियल सेहत का मुख्य हिस्सा बन गई है।

बोर्ड की जवाबदेही बढ़ी

रेगुलेटर अब चाहता है कि बैंकों के बोर्ड IT से जुड़ी समस्याओं को महज बैक-ऑफिस का काम न समझें। इसे अब एक 'फर्स्ट-ऑर्डर रिस्क' की तरह मैनेज करना होगा। डिजिटल फाइनेंशियल सेवाओं के बढ़ते दायरे को देखते हुए यह कदम बेहद जरूरी है। उदाहरण के लिए, UPI ने अगस्त 2026 में 24.9 अरब ट्रांजेक्शन किए, जिनकी वैल्यू करीब ₹30 लाख करोड़ रही। इतने बड़े स्तर पर काम करने वाली प्रणालियों में चूक की गुंजाइश नहीं है।

थर्ड-पार्टी रिस्क पर RBI की नजर

RBI ने साफ कर दिया है कि बैंक अपने क्लाउड सर्विसेज और सॉफ्टवेयर के लिए चाहे थर्ड-पार्टी वेंडर पर निर्भर हों, लेकिन जवाबदेही बैंक की ही होगी। अगर वेंडर के लेवल पर कोई फेल्योर होता है, तो बैंक अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते। साथ ही, बैंकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर करने की हिदायत दी गई है।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

इस निर्देश का मतलब है कि बैंकों को साइबर सिक्योरिटी, कंप्लायंस और बैकअप सिस्टम बनाने के लिए अब ज्यादा खर्च करना होगा। हालांकि यह लंबी अवधि के लिए बेहतर है, लेकिन निकट भविष्य में इससे बैंकों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। अब निवेशकों को बैंकों के मैनेजमेंट से यह देखना होगा कि वे टेक्नोलॉजी अपग्रेड और सुरक्षा के लिए क्या रणनीति अपना रहे हैं ताकि वे रेगुलेटरी पेनल्टी से बच सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.