भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज से शुरू हो रही है। बढ़ती खाद्य महंगाई और कच्चे तेल की कीमतों के चलते एक्सपर्ट्स **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी के साथ रेपो रेट के **5.50%** पर पहुंचने की आशंका जता रहे हैं।
महंगाई पर लगाम की कोशिश
अगस्त में खुदरा महंगाई दर 4.82% दर्ज की गई थी, जो जुलाई के 4.45% से ज्यादा है। इसी को देखते हुए बाजार में इस बात की चर्चा तेज है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा कर सकता है, जिससे यह 5.50% के स्तर पर पहुंच जाएगा।
क्यों बढ़ रहा है दबाव?
इस चिंता की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड $107 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जिससे 'इंपोर्टेड इन्फ्लेशन' (Imported Inflation) का खतरा बढ़ गया है। ICICI Prudential Life Insurance की टीम का मानना है कि RBI सतर्क रुख अपना सकता है, लेकिन अगर भू-राजनीतिक तनाव नहीं बढ़ा, तो यह रेट हाइक साइकल बहुत ज्यादा आक्रामक नहीं होगा।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सीधा असर लोन की लागत पर पड़ेगा। जिन कंपनियों पर कर्ज का बोझ ज्यादा है, उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है। हालांकि, बाजार की मजबूती अभी भी बरकरार है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के बावजूद घरेलू बाजार टिके हुए हैं। ICICI Prudential ने अपने जून 2026 तिमाही के नतीजों में 27.84% का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो वित्तीय क्षेत्र की मजबूती को दर्शाता है।
निवेशकों की नजरें अब 7 अक्टूबर को होने वाली RBI की घोषणा पर टिकी हैं। बाजार यह समझने की कोशिश करेगा कि भविष्य में ब्याज दरों का रास्ता क्या होगा और महंगाई को लेकर बैंक का क्या असेसमेंट है।
