RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की बैठक **7 अक्टूबर** को होने वाली है। **4.8%** की महंगाई दर के बीच मार्केट की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सेंट्रल बैंक ब्याज दरों और लिक्विडिटी को लेकर कोई बड़ा बदलाव करेगा।
बैठक का महत्व
7 अक्टूबर, 2026 को होने वाली RBI की MPC बैठक पूरे फाइनेंशियल सिस्टम के लिए एक बड़ा इवेंट है। मार्केट के जानकारों का ध्यान इस बात पर है कि क्या आरबीआई अपना 'न्यूट्रल' स्टैंड बरकरार रखेगा या फिर महंगाई को काबू में रखने के लिए ज्यादा सख्त रुख अपनाएगा।
क्यों बढ़ रहे हैं बॉन्ड यील्ड्स?
मीटिंग से पहले ही निवेशकों में बेचैनी साफ दिख रही है। 2 साल के सरकारी बॉन्ड (G-Sec) के यील्ड में पिछले कुछ दिनों में 50 बेसिस पॉइंट्स से ज्यादा की तेजी आई है। आमतौर पर बॉन्ड यील्ड्स तब बढ़ते हैं जब मार्केट को या तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी का डर होता है या फिर सिस्टम में लिक्विडिटी कम होने की उम्मीद होती है। बढ़ते यील्ड्स का सीधा असर इक्विटी मार्केट पर पड़ता है क्योंकि इससे कंपनियों की बरोइंग कॉस्ट (Borrowing Cost) बढ़ जाती है।
लिक्विडिटी का गणित
RBI के सामने एक बड़ी चुनौती सिस्टम में मौजूद ज्यादा लिक्विडिटी को मैनेज करने की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंकों में FCNR(B) डिपॉजिट्स $130 बिलियन के पार पहुंच चुके हैं। इस कैश के कारण मार्केट में वोलेटिलिटी न बढ़े, इसके लिए आरबीआई लगातार एक्टिव बॉन्ड सेल्स और वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो ऑक्शन जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
RBI का रुख पूरी तरह से डेटा-आधारित (Data-dependent) होगा। अगर महंगाई दर चिपचिपी बनी रहती है, तो सेंट्रल बैंक सख्त रुख अपना सकता है। हालांकि, अगर इकोनॉमी को सपोर्ट की जरूरत दिखी, तो दरों में बदलाव न करने का विकल्प भी खुला है। निवेशकों के लिए सबसे जरूरी यह देखना होगा कि आरबीआई महंगाई को लेकर क्या नजरिया रखता है, क्योंकि यही संकेत आने वाले महीनों में शेयर और बॉन्ड मार्केट की दिशा तय करेंगे।
