ई-कॉमर्स पर RBI का नया रेगुलेशन
RBI अब ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस और उन सेंट्रल प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी नजर रखेगा जो डिजिटल पेमेंट्स को हैंडल करते हैं। डिजिटल पेमेंट्स सिस्टम में उनके बढ़ते महत्व को देखते हुए, यह कदम इस क्षेत्र में अधिक सीधी रेगुलेशन की ओर इशारा करता है।
अनधिकृत ट्रांजैक्शन में 'साझा जिम्मेदारी'
डिजिटल पेमेंट्स में ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने के लिए RBI एक 'शेयर्ड लायबिलिटी फ्रेमवर्क' (shared liability framework) ला रहा है। इसके तहत, अनधिकृत (unauthorized) डिजिटल पेमेंट्स की स्थिति में ग्राहक के बैंक और पैसे प्राप्त करने वाले बैंक, दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी होगी।
नॉन-बैंक ऑपरेटर्स के लिए नई गाइडलाइन्स
नॉन-बैंक पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर्स (Payment System Operators - PSOs) के लिए एक 'साइबर की रिस्क इंडिकेटर्स' (Cyber Key Risk Indicators - KRI) फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया गया है। यह डेटा-आधारित IT निगरानी को मजबूत करेगा।
पेमेंट इनोवेशन को बढ़ावा
RBI पेमेंट सिस्टम में नवाचार (innovation) को भी बढ़ावा दे रहा है। इसमें आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) के लिए 'व्हाइट-लेबल सॉल्यूशंस' की खोज और असिस्टेंट पेमेंट प्रोवाइडर्स को रेगुलेटरी गाइडेंस के तहत लाना शामिल है। धोखाधड़ी रोकने के लिए 'डोमेस्टिक लीगल एंटिटी आइडेंटिफायर' (Domestic Legal Entity Identifier - DLEI) फ्रेमवर्क भी लाया जाएगा।
कार्ड और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स पर फोकस
'पेमेंट्स विजन 2028' में कार्ड पेमेंट्स सिस्टम को बेहतर बनाने, टोकेनाइजेशन (tokenization) और क्लियर प्राइसिंग पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, 2028 तक क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स की एफिशिएंसी (efficiency) की समीक्षा की जाएगी, जिससे भारत के ग्लोबल ट्रेड इंटीग्रेशन को सपोर्ट मिलेगा।