भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) जमाओं (FCNR(B) deposits) के लिए अपनी विशेष स्वैप फैसिलिटी को तय समय सीमा 30 सितंबर 2026 तक जारी रखने का ऐलान किया है।
30 सितंबर 2026 तक जारी रहेगी खास सुविधा
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि इस सुविधा को समय से पहले बंद करने की कोई योजना नहीं है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब इस स्कीम के तहत अब तक लगभग $36.725 अरब (लगभग ₹3 लाख करोड़ से ज़्यादा) की डिपोजिट आकर्षित हो चुकी हैं।
क्या है FCNR(B) स्वैप फैसिलिटी?
यह सुविधा बैंकों को प्रवासी भारतीयों (NRIs) से विदेशी मुद्रा जमाएं जुटाने में मदद करती है। इसमें RBI, बैंकों के लिए करेंसी हेजिंग (मुद्रा उतार-चढ़ाव के जोखिम से बचाव) की लागत वहन करता है। इस छूट के कारण बैंक NRIs को 3-5 साल की डिपोजिट पर ज़्यादा और प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें दे पाते हैं, जिससे भारत में डॉलर्स का आना आसान हो जाता है।
विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये को मजबूती
इस फैसिलिटी के ज़रिए आए डॉलर्स ने भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत किया है और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच भारतीय रुपये को भी सहारा दिया है। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि रुपया अभी भी मजबूत स्थिति में है, और हालिया उतार-चढ़ाव का मुख्य कारण भू-राजनीतिक कारक रहे हैं, न कि कोई बुनियादी कमजोरी।
आगे क्या?
बाजार की नज़रें अब 30 सितंबर 2026 की समय सीमा के बाद की स्थिति पर होंगी। जब तक यह विंडो खुली है, बैंक हेजिंग का जोखिम RBI पर डालकर ज़्यादा ब्याज दे सकते हैं। लेकिन, विंडो बंद होने के बाद, बैंकों को नए FCNR(B) डिपोजिट पर ब्याज दरों को करेंसी हेजिंग की वास्तविक लागत के हिसाब से एडजस्ट करना पड़ सकता है।
