भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ऐसे लोन ऑफर्स के खिलाफ आगाह किया है जो अर्जेंट पैसों की जरूरत का फायदा उठाते हैं। धोखेबाज प्रोफेशनल वेबसाइट्स और फिशिंग कॉल्स का इस्तेमाल कर लोगों से पैसे और जरूरी डेटा चुरा रहे हैं।
अर्जेंट जरूरत वालों को ऐसे बनाते हैं शिकार
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने धोखाधड़ी वाले लोन स्कीम्स के बढ़ने पर एक नई चेतावनी जारी की है। ये स्कैम खास तौर पर उन लोगों को टारगेट करते हैं जिन्हें पैसों की तत्काल जरूरत होती है। ये जालसाज जल्दबाजी की मजबूरी का फायदा उठाकर लोगों से प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर पहले पैसे ऐंठ लेते हैं।
धोखेबाज अपनाते हैं ये तरीके
धोखेबाज अक्सर खुद को प्री-अप्रूव्ड लोन देने का दावा करके तुरंत संपर्क करते हैं। RBI ने बताया है कि ये लोग हाई-प्रेशर सेल्स टैक्टिक्स का इस्तेमाल करते हैं। असली बैंक और NBFCs सही प्रक्रिया अपनाते हैं, जिसमें ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और एलिजिबिलिटी के बारे में साफ-साफ बताया जाता है। वहीं, स्कैमर क्रेडिट चेक या इनकम वेरिफिकेशन जैसी जरूरी जांचों को नजरअंदाज करते हुए, किसी को भी लोन देने का वादा करते हैं।
डिजिटल धोखाधड़ी का जाल
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके, ये स्कैमर असली बैंकों और फाइनेंशियल कंपनियों जैसी दिखने वाली प्रोफेशनल वेबसाइट्स बना लेते हैं। इससे आम लोगों के लिए असली और नकली प्लेटफॉर्म में फर्क करना मुश्किल हो जाता है। RBI का कहना है कि कोई भी वेबसाइट या ऐप अच्छा दिखना उसकी विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। लोन के लिए अप्लाई करने या कोई भी डॉक्यूमेंट शेयर करने से पहले, RBI की वेबसाइट पर लेंडर की रजिस्ट्रेशन स्टेटस जरूर चेक करें।
डेटा चोरी से कैसे बचें
पैसों के नुकसान के अलावा, इन स्कैम का एक और मकसद होता है - लोगों की संवेदनशील पर्सनल जानकारी चुराना। धोखेबाज कॉल पर भरोसेमंद लगने के लिए आपके बारे में कुछ बेसिक जानकारी का इस्तेमाल कर सकते हैं। वे अक्सर बैंक प्रतिनिधि बनकर वन-टाइम पासवर्ड (OTP), बैंक अकाउंट नंबर या डेबिट कार्ड डिटेल्स मांगते हैं। याद रखें, कोई भी असली फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन फोन पर कभी भी OTP या गोपनीय बैंकिंग जानकारी नहीं मांगता। अगर कोई ऐसी जानकारी मांगे, तो तुरंत कॉल काट दें और वेरिफाइड ऑफिशियल कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करें।
अपने लेंडर की ऐसे करें पहचान
सुरक्षित रहने के लिए, कर्जदारों को हमेशा RBI द्वारा जारी रेगुलेटेड एंटिटीज की लिस्ट चेक करनी चाहिए। कोई भी पर्सनल जानकारी देने से पहले, लेंडर की वेबसाइट एड्रेस को ध्यान से देखें और सुनिश्चित करें कि वह ऑफिशियल डोमेन से मेल खाती है। अगर शक हो, तो सीधे ब्रांच जाकर या वेरिफाइड ऑफिशियल मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करके लोन प्रोसेस करना सबसे सुरक्षित तरीका है। थोड़ा सा समय निकालकर यह बैकग्राउंड चेक करना बहुत जरूरी है, क्योंकि इन स्कैम से होने वाला फाइनेंशियल नुकसान बहुत गंभीर हो सकता है।
