RBI का Standard Chartered पर एक्शन
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) एक विदेशी बैंक, स्टैंडर्ड चार्टर्ड (Standard Chartered Bank), के खिलाफ एक गंभीर शिकायत की जांच कर रहा है। शिकायत में बैंक पर 'मिलीभगत से बार-बार संपत्ति को डिस्काउंट पर बेचने' का आरोप लगाया गया है। यह मामला तीन प्रॉपर्टी डेवलपर्स से जुड़ी संपत्तियों से संबंधित है।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में पुष्टि की है कि इस संबंध में RBI को दो शिकायतें मिली हैं। पहली शिकायत अक्टूबर 2024 में दर्ज की गई थी, जिस पर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है। दूसरी शिकायत फरवरी 2026 में मिली है और वह फिलहाल समीक्षाधीन है। मंत्री ने यह भी कहा कि इस तरह की संपत्ति की बिक्री को सामान्य तौर पर सुरक्षित लेनदारों के लिए एक 'व्यावसायिक निर्णय' माना जाता है। लेकिन, RBI की सक्रिय जांच से पता चलता है कि वह इन सौदों में संभावित नियामक उल्लंघनों, मिलीभगत और जानबूझकर कम मूल्य पर संपत्ति बेचने के आरोपों की बारीकी से पड़ताल कर रहा है। Standard Chartered India ने इस मामले पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
Standard Chartered India का ट्रैक रिकॉर्ड
Standard Chartered बैंक भारत में एक प्रमुख विदेशी बैंक है, जिसके देश भर में लगभग 100 ब्रांच हैं। पिछले फाइनेंशियल ईयर 2025 में, बैंक ने कम खर्चों और प्रोविजन्स का फायदा उठाते हुए टैक्स से पहले 54.2 करोड़ डॉलर का मुनाफा दर्ज किया था, जो 15% की बढ़ोतरी थी। हालांकि, बैंक का ऑपरेटिंग इनकम थोड़ा कम हुआ था।
अपने वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद, Standard Chartered India को पहले भी रेगुलेटरी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। जनवरी 2021 में, बैंक पर ग्राहक संरक्षण, साइबर सुरक्षा और क्रेडिट कार्ड नियमों का पालन न करने पर ₹1.95 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। इससे पहले, मनी लॉन्ड्रिंग-रोधी (anti-money laundering) और धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग में विफलता के लिए ₹2 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था। हाल ही में, 2025 के मध्य में, RBI ने बैंक द्वारा छोटे और मध्यम आकार के व्यवसायों को जटिल डेरिवेटिव उत्पाद (complex derivative products) बेचने में कथित समस्याओं की भी जांच की थी, जिसके बारे में कहा जाता है कि इससे विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव्स (forex derivatives) टीम से कर्मचारियों की छुट्टी हुई थी। ये पिछली घटनाएं बैंक के अनुपालन (compliance) पर लगातार रेगुलेटरी ध्यान का संकेत देती हैं।
भारतीय रियल एस्टेट का संदर्भ
Standard Chartered के खिलाफ यह शिकायत प्रॉपर्टी डेवलपर्स से जुड़ी है, जो इसे भारत के जटिल रियल एस्टेट बाजार के संदर्भ में रखती है। हालांकि इस सेक्टर ने चुनौतियों का सामना किया है, जिसमें BSE रियलिटी इंडेक्स जून 2024 के उच्चतम स्तर से 30% से अधिक गिर गया है और निर्माण पूर्णता दर में कमी आई है, वहीं मजबूती के संकेत भी हैं। प्रमुख सूचीबद्ध डेवलपर्स ने अपनी वित्तीय सेहत मजबूत की है, FY25 तक औसत नेट डेट-टू-इक्विटी रेशियो घटकर 0.05 हो गया है। खासकर लग्जरी हाउसिंग मार्केट ने मजबूत ग्रोथ देखी है। चुनौतियों और लचीलेपन के इस मिले-जुले परिदृश्य का मतलब है कि इस सेक्टर में संपत्ति के मूल्यांकन और बिक्री पर कर्जदाताओं और नियामकों की कड़ी नजर है।
संभावित जोखिम और नियामक चिंताएं
RBI की जांच Standard Chartered के लिए कई संभावित जोखिम पैदा करती है। यदि गलत काम पाया जाता है, तो बैंक को भारी जुर्माने, प्रतिष्ठा को नुकसान और सख्त रेगुलेटरी निगरानी का सामना करना पड़ सकता है, जो भविष्य के कारोबार और निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकता है। नियामक बैंक के पिछले मुद्दों, जैसे डेरिवेटिव बिक्री और रिपोर्टिंग की समस्याओं को, व्यापक अनुपालन कमजोरियों के संकेत के रूप में देख सकते हैं। हालांकि बैंक तर्क दे सकता है कि संपत्ति की बिक्री नियमित 'व्यावसायिक निर्णय' हैं, 'मिलीभगत' और 'डिस्काउंटेड मूल्य' पर ध्यान केंद्रित करने से पता चलता है कि RBI बाजार में हेरफेर या अनुचित सौदों की तलाश कर रहा है। भारत में विदेशी बैंक सख्त नियमों के तहत काम करते हैं, और Standard Chartered द्वारा किसी भी पुष्टि किए गए उल्लंघन से पूरे उद्योग में मजबूत अनुपालन और प्रवर्तन की मांग हो सकती है।