12 अक्टूबर 2026 को Indian Rupee ने शानदार रिकवरी दिखाते हुए **95.80** के स्तर पर वापसी की है। Reserve Bank of India (RBI) ने करेंसी में आ रही भारी गिरावट को रोकने के लिए सीधे बाजार में दखल दिया है और तेल कंपनियों के लिए डॉलर की अलग से व्यवस्था की है।
ऑयल कंपनियों के लिए राहत का रास्ता
केंद्रीय बैंक ने तीन बड़ी सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों - Indian Oil Corporation (IOCL), Hindustan Petroleum (HPCL), और Bharat Petroleum (BPCL) के लिए एक विशेष डॉलर विंडो खोल दी है। आम तौर पर ये कंपनियां कच्चे तेल के इंपोर्ट के लिए रोजाना खुले बाजार से भारी मात्रा में डॉलर खरीदती हैं, जिससे रुपये पर दबाव बनता है। RBI की इस सीधी सप्लाई से बाजार में डॉलर की डिमांड कम हुई है, जिसका असर रुपये की मजबूती के रूप में दिखा है।
करेंसी डेरिवेटिव्स पर सख्त लगाम
RBI ने करेंसी में सट्टा (Speculation) रोकने के लिए नियमों को और कड़ा कर दिया है। बिना किसी बिजनेस कारण के करेंसी कॉन्ट्रैक्ट्स में पोजीशन लेने की सीमा को $100 मिलियन से घटाकर अब सिर्फ $5 मिलियन कर दिया गया है। इसके अलावा, $2 मिलियन से ज्यादा के किसी भी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट पर अब फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को 20% का फॉरेन एक्सचेंज रिस्क रिजर्व रखना अनिवार्य होगा।
बाजार के सामने बड़ी चुनौतियां
हालांकि यह दखल अल्पकालिक राहत तो दे रहा है, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर चिंताएं बरकरार हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार $100 प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। सबसे बड़ी चिंता का विषय FII (Foreign Institutional Investors) की बिकवाली है। अक्टूबर 2026 में अब तक FIIs ने ₹44,166 करोड़ की निकासी की है, जिससे साल भर का कुल आउटफ्लो ₹3 लाख करोड़ के पार निकल गया है। जानकारों का मानना है कि RBI को अब अपने फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व और बाजार की तरलता (Liquidity) के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा।
