रेपो रेट जस का तस: क्या है RBI का अगला कदम?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की फरवरी 2026 की मीटिंग का नतीजा आ गया है। कमेटी ने सर्वसम्मति से बड़ा फैसला सुनाते हुए पॉलिसी रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने का ऐलान किया है। यह फैसला काफी हद तक अनुमानित था और इसने RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की टीम के न्यूट्रल मॉनेटरी स्टान्स (neutral monetary stance) को जारी रखा है।
प्रमुख बैंकों जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और इंडियन बैंक ने पॉलिसी स्टेबिलिटी (policy stability) का स्वागत किया है, जिससे उन्हें राहत मिली है। हालांकि, कैपिटलएक्सबी (CapitalXB) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अजीतभ भारती ने इस पर निराशा जताई है। उनका तर्क है कि जहां एक ओर महंगाई मल्टी-ईयर लो (multi-year low) पर है, वहीं दूसरी ओर ऊंची उधार लागत (borrowing costs) भारतीय उद्यमियों और MSMEs के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनी हुई है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का वैल्यूएशन
मौजूदा पॉलिसी माहौल में, SBI का TTM P/E रेश्यो (P/E ratio) करीब 11.36-12.2x और इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) का 13.98-14.0x है। वहीं, इंडियन बैंक का TTM P/E 10.1-10.28x के आसपास है। ये वैल्यूएशन्स (valuations) मौजूदा माहौल में उनकी अर्निंग कैपेसिटी (earnings capacity) के प्रति मार्केट के कंफर्ट (comfort) को दर्शाते हैं।
ग्रोथ और महंगाई पर RBI का अनुमान
RBI ने फाइनेंशियल ईयर 26 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.4% पर मजबूत रखा है, जबकि इंफ्लेशन (inflation) का अनुमान 2.1% पर काफी कम है। ये आंकड़े बैंकिंग सेक्टर के लिए एक सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
रेगुलेटरी सुधार बनाम MSME की चिंता
रेपो रेट के फैसले के अलावा, RBI ने कई रेगुलेटरी और डेवलपमेंटल पॉलिसीज़ (regulatory and developmental policies) भी जारी की हैं। इनमें कस्टमर प्रोटेक्शन (customer protection) को मजबूत करने, डिजिटल पेमेंट (digital payments) को सुरक्षित बनाने के उपाय, लीड बैंक स्कीम (lead bank scheme) की समीक्षा और किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) फ्रेमवर्क में सुधार शामिल हैं।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक इंडिया (Standard Chartered Bank India) ने MSME लोन लिमिट (loan limit) बढ़ाकर, NBFCs को सपोर्ट देकर और कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट (corporate bond market) को डेवलप करके फाइनेंशियल इन्क्लूजन (financial inclusion) पर जोर देने की सराहना की है। टाटा कैपिटल (Tata Capital) के MD और CEO का भी मानना है कि पॉलिसी स्टेबिलिटी NBFCs के लिए क्रेडिट मोमेंटम (credit momentum) बढ़ाएगी।
MSMEs के लिए उधार की लागत
हालांकि, कैपिटलएक्सबी (CapitalXB) की आलोचना एक बड़े ग्रोथ कन्जेंड्रम (growth conundrum) को उजागर करती है। RBI जहां इंफ्लेशन कंट्रोल (inflation control) और स्टेबिलिटी पर फोकस कर रहा है, वहीं कैपिटल की कॉस्ट (cost of capital) कई MSMEs के लिए बड़ा बैरियर (barrier) बनी हुई है।
RBI ने MSMEs के लिए कोलैटरल-फ्री लोन लिमिट (collateral-free loan limit) को ₹10 लाख से दोगुना कर ₹20 लाख करने का प्रस्ताव दिया है, ताकि छोटे यूनिट्स (units) के लिए क्रेडिट एक्सेस (credit access) आसान हो सके। सेंट्रल बैंक (Central Bank) का न्यूट्रल स्टान्स (neutral stance) डेटा-डिपेंडेंट अप्रोच (data-dependent approach) को दिखाता है।
दिसंबर 2025 में भारत की इंफ्लेशन रेट 1.33% थी, जो RBI की टॉलरेंस बैंड (tolerance band) में थी। इससे कैपिटलएक्सबी जैसे क्रिटिक्स (critics) के रेट ईजिंग (rate easing) की मांग को बल मिलता है।
एनालिस्ट्स की राय और भविष्य का संकेत
एनालिस्ट्स (Analysts) RBI के फैसले को एक प्रैक्टिकल पॉज (pragmatic pause) मान रहे हैं। एलारा सिक्योरिटीज (Elara Securities) की इकोनॉमिस्ट गरिमा कपूर (Garima Kapoor) के अनुसार, MPC ने पिछले रेट कट्स (rate cuts) के इफेक्टिव ट्रांसमिशन (effective transmission) और हेल्दी ग्रोथ (healthy growth) पर ध्यान केंद्रित किया है।
फूड प्राइस (food prices) नॉर्मलाइज (normalize) होने और अनफेवरेबल बेस इफेक्ट्स (unfavorable base effects) के कारण इंफ्लेशन बढ़ने की उम्मीद है, जिससे आगे रेट कट्स की गुंजाइश कम दिख रही है। RBI डोमेस्टिक और ग्लोबल कंडीशंस (domestic and global conditions) पर बारीकी से नजर रखेगा।
FY2025/26 के लिए GDP ग्रोथ फोरकास्ट (forecast) 7.4% (पहले 7.3% था) और इंफ्लेशन 2.1% का अनुमान बताता है कि मौजूदा पॉलिसी सेटिंग्स ग्रोथ और प्राइस स्टेबिलिटी (price stability) के बीच संतुलन बनाने के लिए उपयुक्त मानी जा रही हैं। बॉन्ड यील्ड्स (bond yields) में रेंज-बाउंड (range-bound) रहने की उम्मीद है, अगर इंफ्लेशन कंट्रोल जारी रहता है।