RBI Repo Rate Hike: RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर **5.50%** किया, Ambit ने ग्रोथ को लेकर दी चेतावनी

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AuthorMehul Desai|Published at:
RBI Repo Rate Hike: RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर **5.50%** किया, Ambit ने ग्रोथ को लेकर दी चेतावनी

महंगाई को काबू में करने के लिए RBI ने रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी की है, जिससे यह अब **5.50%** पर पहुंच गया है। RBI के इस 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (calibrated tightening) वाले रुख के बाद बाजार में चिंता है कि ज्यादा ब्याज दरें देश की ग्रोथ पर ब्रेक लगा सकती हैं।

RBI ने 7 अक्टूबर, 2026 को रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा करते हुए इसे 5.50% कर दिया है। इस कदम के बाद शेयर बाजार (Sensex और Nifty) में गिरावट देखी गई। अब निवेशकों को इस बात की चिंता सता रही है कि महंगी कर्ज दरों का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे और आम ग्राहकों की जेब पर कितना भारी पड़ेगा।

बैंकिंग मार्जिन पर असर

Ambit के एनालिस्ट धीरज अग्रवाल का मानना है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का शुरुआती फायदा बैंकों को मिलता है। बैंक लोन पर ब्याज दरें तुरंत बढ़ा देते हैं, जबकि डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ने में समय लगता है, जिससे बैंकों का प्रॉफिट मार्जिन अस्थायी रूप से बढ़ जाता है। फिलहाल बैंकों की क्रेडिट ग्रोथ 17% से 20% के बीच बनी हुई है, जो उन्हें इस झटके से बचाने में मदद कर रही है। हालांकि, अगर RBI लगातार दरों में सख्ती करता है, तो यह मार्जिन लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा।

क्रेडिट ग्रोथ और कंजम्पशन पर जोखिम

Ambit ने आगाह किया है कि अगर रेपो रेट में 4 बार से ज्यादा बढ़ोतरी हुई, तो यह क्रेडिट ग्रोथ के लिए खतरनाक हो सकता है। ब्याज दरें बढ़ने से रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे, क्योंकि इन सेक्टरों में लोन की मांग बहुत ज्यादा रहती है। घर और गाड़ी के लिए बढ़ती EMI सीधे तौर पर लोगों की खरीदारी के फैसले को कमजोर कर सकती है।

बदलती कंज्यूमर पसंद

ब्याज दरों के अलावा कंजम्पशन का ढांचा भी बदल रहा है। अब पुराने डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क वाली कंपनियां नए डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड्स से मुकाबला कर रही हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते प्रभाव से छोटी जगहों पर भी कन्वेंशनल ब्रांड्स के लिए चुनौती बढ़ गई है। ऐसे में एनालिस्ट अब उन कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं जो 'डिस्क्रिशनरी कंजम्पशन' (discretionary consumption) यानी गैर-जरूरी खर्चों वाले सेक्टर में काम कर रही हैं, क्योंकि वे ज्यादा मजबूत दिख रही हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.