RBI ने अचानक रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** का इजाफा कर इसे **5.50%** कर दिया है। साथ ही, केंद्रीय बैंक ने अपना रुख बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' (Calibrated Tightening) कर लिया है, जिससे बॉन्ड यील्ड उछलकर **7.27%** पर पहुंच गई है।
भारतीय डेट और इक्विटी मार्केट के लिए 7 अक्टूबर, 2026 का दिन काफी उठापटक भरा रहा। RBI के अचानक आए इस फैसले के बाद बाजार में हड़कंप मच गया। रेपो रेट में हुई 25 bps की बढ़ोतरी के साथ ही पॉलिसी स्टैंड को न्यूट्रल से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' करना निवेशकों के लिए एक बड़ा सरप्राइज रहा।
बॉन्ड मार्केट पर असर
इस खबर के तुरंत बाद, 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड जो पहले 7.19% पर थी, वह उछलकर 7.27% के इंट्राडे हाई पर पहुंच गई। बढ़ती यील्ड इस बात का संकेत है कि मार्केट को अब आने वाले समय में ऊंची ब्याज दरों का लंबा दौर देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा असर कंपनियों और आम आदमी की लोन कॉस्ट पर पड़ेगा।
शेयर बाजार में गिरावट
इस सख्ती का असर इंडेक्स पर भी दिखा। Sensex 0.59% गिरकर 72,638.7 और Nifty 50 0.76% फिसलकर 22,603.05 पर बंद हुआ। सबसे ज्यादा दबाव ऑटोमोबाइल, रियल एस्टेट और FMCG सेक्टर के शेयरों पर देखा गया, क्योंकि इन क्षेत्रों में लोन की लागत बढ़ना बिजनेस के लिए बड़ा जोखिम है।
इकोनॉमी के लिए क्या है चुनौतियां?
RBI ने FY27 के लिए जीडीपी (GDP) ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.1% कर दिया है, जो एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) ऑयल की कीमतें $102 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो महंगाई और व्यापार घाटे (Trade Balance) के लिए बड़ा रिस्क है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले महीनों में RBI और भी रेट हाइक करेगा। कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने वाला असर और विदेशी निवेशकों (FII) का रुख अब मार्केट की दिशा तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाएंगे।
