RBI Repo Rate Hike: महंगाई पर नकेल कसने की तैयारी, रेपो रेट **0.25%** बढ़ाकर **5.5%** किया

BANKINGFINANCE
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
RBI Repo Rate Hike: महंगाई पर नकेल कसने की तैयारी, रेपो रेट **0.25%** बढ़ाकर **5.5%** किया

Reserve Bank of India ने रेपो रेट में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी कर इसे **5.50%** कर दिया है। 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' के रुख के साथ RBI ने स्पष्ट कर दिया है कि सस्ते कर्ज का दौर अब खत्म हो गया है, जिसका सीधा असर होम लोन और बॉन्ड मार्केट पर पड़ेगा।

अब EMI का बोझ बढ़ने को तैयार

7 अक्टूबर 2026 को रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स का इजाफा कर इसे 5.50% पर पहुंचा दिया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब RBI ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। RBI का रुख अब 'न्यूट्रल' से बदलकर 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' हो गया है, जिसका मतलब है कि अगर महंगाई काबू में नहीं आई, तो आने वाले समय में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है।

क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?

अगस्त में महंगाई दर 4.8% पर थी, जो सेंट्रल बैंक के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनावों के बीच RBI का पूरा जोर कंज्यूमर प्राइसेस को कंट्रोल करने पर है। हालांकि, RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1% पर बरकरार रखा है।

डेट मार्केट (Debt Market) के लिए चुनौतियां

जैसे-जैसे ब्याज दरें बढ़ती हैं, पुराने बॉन्ड्स की वैल्यू कम होने लगती है। खास तौर पर वे निवेशक जो 10 साल से अधिक की मैच्योरिटी वाले लॉन्ग-ड्यूरेशन डेट फंड्स में निवेशित हैं, उन्हें सावधानी बरतने की जरूरत है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस अनिश्चितता के दौर में शॉर्ट-ड्यूरेशन इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है क्योंकि इनका रिटर्न नए बढ़ते रेट्स के साथ जल्दी एडजस्ट हो जाता है।

बैंक ग्राहकों पर क्या असर?

आम आदमी के लिए यह खबर जेब पर भारी पड़ने वाली है। चूंकि होम लोन और कार लोन की दरें सीधे रेपो रेट से जुड़ी होती हैं, इसलिए आने वाले हफ्तों में बैंकों के अपने लेंडिंग रेट्स बढ़ाने की पूरी उम्मीद है। इसका सीधा असर आपकी EMI में बढ़ोतरी या लोन अवधि (Tenure) के विस्तार के रूप में दिखेगा। अच्छी खबर यह है कि आने वाले दिनों में बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर भी ब्याज दरें बढ़ सकती हैं, हालांकि बैंकों की ओर से इसका लाभ ग्राहकों तक पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.