RBI गवर्नर की बड़ी चेतावनी! महंगाई पर कसेंगे नकेल, MPC मीटिंग से पहले बोले - 'ग्रोथ नहीं, स्टेबिलिटी पहली प्राथमिकता'

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI गवर्नर की बड़ी चेतावनी! महंगाई पर कसेंगे नकेल, MPC मीटिंग से पहले बोले - 'ग्रोथ नहीं, स्टेबिलिटी पहली प्राथमिकता'

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कर दिया है कि आगामी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग से पहले महंगाई को काबू में रखना केंद्रीय बैंक की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक ग्रोथ से ज्यादा जरूरी वित्तीय स्थिरता बनाए रखना है।

Detailed Coverage

महंगाई पर कसेगा शिकंजा: RBI गवर्नर का बड़ा बयान

आगामी मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग से ठीक पहले, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने एक बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने साफ किया है कि महंगाई को कंट्रोल करना केंद्रीय बैंक की सबसे पहली और अहम जिम्मेदारी है। हालांकि, RBI हमेशा से आर्थिक ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता आया है, लेकिन गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि भविष्य के सभी फैसले आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे, क्योंकि महंगाई का खतरा एक बार फिर बढ़ रहा है।

ग्रोथ की जगह स्थिरता पर जोर

गवर्नर मल्होत्रा ने समझाया कि पिछली बार की तरह ब्याज दरों में कटौती करके ग्रोथ को बढ़ावा देने की गुंजाइश फिलहाल नहीं है। मौजूदा हालात में महंगाई को काबू में रखना ज़्यादा ज़रूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा रेपो रेट, देश की आर्थिक ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सही है। इसका मतलब है कि RBI फिलहाल फौरी ग्रोथ के लालच में न पड़कर, लंबी अवधि की वित्तीय स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है।

विदेशी निवेश और रुपये पर अपडेट

गवर्नर ने विदेशी पूंजी के प्रवाह पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि FCNR(B) डिपॉजिट जैसे उपायों से अब तक करीब $32 अरब जुटाए गए हैं। वहीं, जून की शुरुआत से सरकारी सिक्योरिटीज में $7 अरब से ज़्यादा का विदेशी निवेश आया है। रुपये की चाल पर चिंता जाहिर करने वालों को जवाब देते हुए मल्होत्रा ने कहा कि भारतीय रुपये के फंडामेंटल्स मजबूत हैं और मौजूदा उतार-चढ़ाव बाजार की उम्मीदों के कारण है, न कि अर्थव्यवस्था की कमजोरी के कारण।

डिजिटल पहलों में तेज़ी

RBI अपनी डिजिटल पहलों को भी आगे बढ़ा रहा है। सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के पायलट प्रोजेक्ट में लगभग 1.2 करोड़ रिटेल यूजर्स जुड़ चुके हैं, और कुल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम लगभग ₹40,000 करोड़ तक पहुंच गया है। इसके अलावा, यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (ULI) का विकास भी एक बड़ा फोकस है, जिसका लक्ष्य विभिन्न डेटा सेट्स और अधिक लेंडर्स को इंटीग्रेट करके एक ज़्यादा कुशल, डिजिटल-फर्स्ट लेंडिंग इकोसिस्टम बनाना है।

बैंकिंग सुधारों पर भी नज़र

नियामक (Regulator) के तौर पर, RBI नए बैंक लाइसेंस देने के मामले में अभी भी सावधानी बरत रहा है। कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक यूनिवर्सल बैंक बनने में रुचि दिखा रहे हैं, लेकिन फिलहाल RBI का ध्यान शहरी सहकारी बैंकों (Urban Cooperative Banks) के कंसॉलिडेशन और मजबूती पर है। इन संस्थाओं के लिए नए लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क पर स्टेकहोल्डर्स से मिले फीडबैक की समीक्षा की जा रही है।

अब निवेशक आगामी MPC मीटिंग के मिनट्स और घोषणाओं का इंतज़ार करेंगे, ताकि यह समझ सकें कि यह डेटा-डिपेंडेंट अप्रोच भविष्य में ब्याज दरों और लिक्विडिटी मैनेजमेंट को कैसे प्रभावित करेगा, जिसका सीधा असर कर्ज की लागत और बैंकिंग सेक्टर के मार्जिन्स पर पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.