रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने फाइनेंशियल मार्केट्स में लिक्विडिटी और सुरक्षा को बेहतर बनाने के लिए 'Technical Consultative Committee for Financial Markets' (TCCFM) का गठन किया है। इसमें SBI, Axis और ICICI जैसे बड़े बैंकों के दिग्गजों को शामिल किया गया है, जो हर तिमाही में मार्केट की तकनीकी दिक्कतों को सुलझाने पर काम करेंगे।
मार्केट में सुधार का लक्ष्य
इस नई कमिटी का मुख्य मकसद भारत के मनी, गवर्नमेंट सिक्योरिटीज और फॉरेन एक्सचेंज मार्केट्स के कामकाज को और भी स्मूथ बनाना है। RBI चाहता है कि सेंट्रल बैंक की नीतियां और बाजार में काम करने वाले लोगों का व्यावहारिक अनुभव एक-दूसरे से जुड़ें। कमिटी का काम 'मार्केट फ्रिक्शन' यानी उन तकनीकी बाधाओं और देरी को पहचानना है, जिनकी वजह से ट्रेडिंग महंगी या मुश्किल हो जाती है।
इस पहल से मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी, जिससे निवेशकों को किसी भी शेयर या एसेट में एंट्री और एग्जिट करना आसान हो जाएगा। साथ ही, यह पैनल ग्लोबल और डोमेस्टिक रिस्क के लिए एक 'अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम' के तौर पर भी काम करेगा।
कमिटी में कौन-कौन है शामिल?
RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन इस कमिटी की अध्यक्षता करेंगे। इसमें सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के दिग्गजों को जगह दी गई है। कमिटी में State Bank of India, Axis Bank, ICICI Bank और Citibank के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इसके अलावा Morgan Stanley India के रिधम देसाई और SEBI के पूर्व होल-टाइम मेंबर अनंत नारायण जैसे एक्सपर्ट्स भी इसमें अपनी राय रखेंगे। यह मिला-जुला पैनल पॉलिसी मेकिंग और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को पाटने का काम करेगा।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
यह कदम एक मजबूत फाइनेंशियल इकोसिस्टम की दिशा में बड़ी पहल है। कमिटी हर तिमाही में बैठक करेगी, जिससे सेंट्रल बैंक तक फीडबैक का एक जरिया बना रहेगा। निवेशकों के लिए अब यह ट्रैक करना जरूरी होगा कि इन बैठकों के बाद कौन से नए रेगुलेटरी बदलाव आते हैं। अगर कमिटी सेटलमेंट और ट्रांजेक्शन में आने वाली देरी को कम कर पाती है, तो यह शेयर बाजार और ट्रेडिंग के लिए एक बड़ी राहत होगी और मार्केट स्टेबिलिटी को बढ़ावा देगी।
