RBI का फॉरेक्स विंडो कमाल! अब तक $20.7 अरब जुटाए, और $10 अरब आने की उम्मीद

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI का फॉरेक्स विंडो कमाल! अब तक $20.7 अरब जुटाए, और $10 अरब आने की उम्मीद

भारतीय बैंकों ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की स्पेशल इंसेंटिव विंडो के जरिए **$20.7 अरब** की रकम जुटाई है। यह कदम देश के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व (Foreign Exchange Reserves) को मजबूत करने और रुपये को सहारा देने के लिए उठाया गया है।

Detailed Coverage

कैसे जुटाए बैंकों ने इतने पैसे?

5 जून को लॉन्च हुई इस सुविधा के तहत, बैंकों ने मुख्य रूप से फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट्स के जरिए $17.4 अरब जुटाए हैं। इसके अलावा, ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग्स (Overseas Foreign Currency Borrowings) और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (External Commercial Borrowings) से $3.3 अरब का योगदान मिला है।

इनफ्लो का अनुमान बढ़ा

इस शुरुआती मजबूत रुझान को देखते हुए, मार्केट एनालिस्ट्स (Market Analysts) ने कुल इनफ्लो के अनुमान को बढ़ा दिया है। IDFC फर्स्ट बैंक के इकोनॉमिस्ट्स (Economists) का मानना है कि FCNR इनफ्लो $60 अरब तक पहुंच सकता है, जो पहले के $50 अरब के अनुमान से काफी ज्यादा है। कुछ एक्सपर्ट्स का तो यह भी कहना है कि एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग्स (ECBs) से अतिरिक्त योगदान को मिलाकर कुल इनफ्लो $80 अरब के पार जा सकता है। यह उम्मीद 2013 के ऐसे ही एक स्कीम पर आधारित है, जिसमें ज्यादातर इनफ्लो प्रोग्राम के आखिरी महीने में आए थे।

बैंकों की भागीदारी

बैंकिंग सेक्टर में अलग-अलग बैंकों ने इस मुहिम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने $3 अरब जुटाए हैं, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) ने 17 जुलाई तक $400 मिलियन से ज्यादा की रकम जुटाई है। मैक्वेरी कैपिटल (Macquarie Capital) की रिसर्च बताती है कि फॉरेन बैंक्स (Foreign Banks) इस मामले में काफी आक्रामक रहे हैं। कुछ संस्थानों ने नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) से डिपॉजिट्स आकर्षित करने के लिए 19 गुना तक का हाई लिवरेज (High Leverage) स्ट्रैटेजी भी अपनाई है।

RBI के रणनीतिक लक्ष्य

RBI का मकसद रुपये को स्थिर करना और इंपोर्टेड इन्फ्लेशन (Imported Inflation) के दबाव को कम करना है। जब करेंसी कमजोर होती है, तो इंपोर्टेड सामान महंगे हो जाते हैं। विदेशी करेंसी लाने के लिए बैंकों को इंसेंटिव देकर, RBI देश के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) को सुधारना चाहता है। FCNR(B) डिपॉजिट्स के लिए विंडो 30 सितंबर तक खुली है, जबकि अन्य कमर्शियल बॉरोइंग्स की सुविधा 31 दिसंबर तक जारी रहेगी। यह देखना अहम होगा कि क्या यह रफ्तार अंत तक बनी रहती है और क्या यह पूंजी का इनफ्लो करेंसी मार्केट की अस्थिरता को कम करने में कामयाब होता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.