RBI का कड़ा एक्शन! बैंकों की ट्रेजरी इनकम में आई भारी गिरावट, HDFC, ICICI, Yes Bank को लगा तगड़ा झटका

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI का कड़ा एक्शन! बैंकों की ट्रेजरी इनकम में आई भारी गिरावट, HDFC, ICICI, Yes Bank को लगा तगड़ा झटका
Overview

HDFC Bank, ICICI Bank और Yes Bank ने Q4 FY26 के लिए अपनी ट्रेजरी इनकम में गिरावट दर्ज की है। इस गिरावट की मुख्य वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए फॉरेक्स (Forex) नियम और इक्विटी (Equity) व बॉन्ड (Bond) बाजारों में आई मंदी रही।

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RBI के नियमों और बाजार की नरमी ने झटके बैंकों के खजाने को!

इस फाइनेंशियल ईयर (FY26) की चौथी तिमाही (Q4) में देश के प्रमुख प्राइवेट बैंकों, HDFC Bank, ICICI Bank और Yes Bank की ट्रेजरी इनकम में बड़ी कमी देखी गई। इसके पीछे दो मुख्य कारण रहे – पहला, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से फॉरेन एक्सचेंज (Forex) ट्रेडिंग को लेकर जारी किए गए नए और सख्त नियम, और दूसरा, जनवरी से मार्च के बीच इक्विटी और बॉन्ड मार्केट में आई जबरदस्त गिरावट।

RBI ने मार्च में बैंकों के लिए ऑनशोर मार्केट में नेट ओपन पोजीशन (NOP) यानी करेंसी में उतार-चढ़ाव को लेकर बैंकों के एक्सपोजर की सीमा को घटाकर $100 मिलियन कर दिया था। यह पिछले लिमिट से काफी कम था, जो बैंकों को उनकी कुल पूंजी का 25% तक एक्सपोजर रखने की इजाजत देता था। खबरें हैं कि कई बड़े बैंक, जिनके NOPs $250-300 मिलियन के बीच थे, उन्हें 10 अप्रैल 2026 तक अपनी पोजीशन कम करनी पड़ी। RBI का यह कदम बढ़ते ग्लोबल वोलेटिलिटी (Volatility) और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच भारतीय रुपये को स्थिर करने के लिए उठाया गया था, जिसका सीधा असर बैंकों की करेंसी ट्रेडिंग से मुनाफा कमाने की क्षमता पर पड़ा।

अलग-अलग बैंकों के नतीजों पर असर

HDFC Bank की नेट ट्रेडिंग और मार्क-टू-मार्केट इनकम Q4 FY26 में घटकर ₹800 करोड़ रह गई, जो पिछली तिमाही में ₹900 करोड़ थी। बैंक के CEO Sashidhar Jagdishan ने मार्च और अप्रैल की शुरुआत में इसका आंशिक असर स्वीकार किया और कहा कि इसने पूरे साल की फॉरेक्स इनकम की ग्रोथ को थोड़ा धीमा किया।

ICICI Bank ने Q4 FY26 के लिए ₹106 करोड़ का ट्रेजरी लॉस (Loss) दर्ज किया। पिछले साल की इसी अवधि में ₹239 करोड़ का फायदा हुआ था, हालांकि यह Q3 FY26 के ₹157 करोड़ के लॉस से बेहतर था। एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर Sandeep Batra ने बताया कि यह लॉस मुख्य रूप से मार्केट के मूवमेंट और RBI के दिशानिर्देशों के बाद स्प्रेड्स (Spreads) के असर के कारण हुआ।

Yes Bank के ट्रेडिंग गेन्स (Gains) भी गिरकर Q4 FY26 में ₹83 करोड़ हो गए, जबकि Q4 FY25 में यह ₹131 करोड़ थे। स्टॉक और बॉन्ड मार्केट में आई व्यापक गिरावट ने भी इन नतीजों पर दबाव डाला, जिससे निवेश पोर्टफोलियो से होने वाले लाभ सीमित हो गए।

मार्केट वैल्यूएशन और सेक्टर ट्रेंड्स

अप्रैल 2026 के मध्य तक, HDFC Bank का फॉरवर्ड P/E 16.2x और TTM P/E 15.54x पर ट्रेड कर रहा था। ICICI Bank का TTM P/E लगभग 17.77x और Yes Bank का लगभग 18x था। ये वैल्यूएशन (Valuations) बड़े बैंकों के ऐतिहासिक औसत के अनुरूप हैं, हालांकि ICICI Bank का P/E भारतीय बैंकिंग इंडस्ट्री के औसत 12x से प्रीमियम पर है।

इन चुनौतियों के बावजूद, Nifty Bank इंडेक्स 2026 की शुरुआत में 60,000 के पार जाकर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा था। हालांकि, RBI के फॉरेक्स नियम ने ट्रेजरी ऑपरेशंस के लिए एक खास चुनौती खड़ी कर दी है। एनालिस्ट्स (Analysts) का मानना ​​है कि पब्लिक सेक्टर बैंक, जिनके NOPs अक्सर बड़े होते थे, वे प्राइवेट बैंकों की तुलना में अपने ट्रेडिंग इनकम पर अधिक महत्वपूर्ण प्रभाव का अनुभव कर सकते हैं। इंडस्ट्री के अनुमानों के अनुसार, इस क्षेत्र को इन फॉरेक्स प्रतिबंधों के कारण ₹40 अरब के वन-ऑफ (One-off) ट्रेजरी लॉस का सामना करना पड़ सकता है।

कंप्लायंस (Compliance) की चुनौतियां और मार्केट की दिक्कतें

बैंकों ने कथित तौर पर RBI से नए $100 मिलियन NOP लिमिट का पालन करने के लिए तीन महीने का एक्सटेंशन (Extension) मांगा है, क्योंकि उन्हें पोजीशन को व्यवस्थित तरीके से खत्म करने और भारी नुकसान की आशंका है। यह रेगुलेटरी (Regulatory) बदलाव, बढ़ते बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) और जारी भू-राजनीतिक तनाव के साथ मिलकर, ट्रेजरी ऑपरेशंस पर अनिश्चितता और दबाव की परतें बढ़ा रहा है।

अल्पकालिक झटकों के बावजूद आउटलुक (Outlook) सकारात्मक

हालांकि RBI के फॉरेक्स उपायों और बाजार की गिरावट ने Q4 FY26 की ट्रेजरी इनकम को प्रभावित किया है, लेकिन बैंकिंग सेक्टर का लॉन्ग-टर्म आउटलुक सावधानीपूर्वक आशावादी बना हुआ है। यह आशावाद मजबूत क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) और स्थिर एसेट क्वालिटी (Asset Quality) से समर्थित है। बैंकों से इन चुनौतियों से निपटने की उम्मीद है, क्योंकि RBI ने संकेत दिया है कि फॉरेक्स उपाय अस्थायी हैं और समीक्षा के अधीन हैं। एनालिस्ट्स लगातार लोन की मांग और संभावित मार्जिन स्थिरीकरण की उम्मीद करते हैं, हालांकि डिपॉजिट जुटाने की प्रतिस्पर्धा और भू-राजनीतिक जोखिम महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.