RBI का बड़ा दांव: फॉरेन करेंसी से आए $32 बिलियन, कुल $85 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI का बड़ा दांव: फॉरेन करेंसी से आए $32 बिलियन, कुल $85 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने खास फॉरेन एक्सचेंज (Forex) पहलों के ज़रिए **$32 बिलियन** जुटाने में कामयाबी हासिल की है। इस कदम का मक़सद विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को मज़बूत करना और भारतीय रुपये को सहारा देना है। अनुमान है कि कुल इनफ्लो **$85 बिलियन** तक पहुंच सकता है, जिससे करेंसी पर दबाव कम होने और बाज़ार की भावनाओं (Market Sentiment) में सुधार की उम्मीद है।

Detailed Coverage

फॉरेन एक्सचेंज में बड़ी कामयाबी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) को मज़बूत करने की अपनी ताज़ा पहल में ज़बरदस्त प्रगति की है, और $32 बिलियन की विदेशी मुद्रा जुटाने में सफलता पाई है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस बात की पुष्टि की है। यह कामयाबी मुख्य रूप से फॉरेन करेंसी नॉन-रेज़िडेंट (बैंक) डिपॉजिट्स, यानी FCNR(B), और एक्सटर्नल कमर्शियल बोरिंग्स (External Commercial Borrowings) पर निर्भर करती है। इन उपायों को अर्थव्यवस्था को सहारा देने और भारतीय रुपये को स्थिर करने के लिए बनाया गया था।

$85 बिलियन की ओर बढ़ता कदम

बाज़ार विशेषज्ञों, जिनमें भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइज़र सौम्या कांति घोष भी शामिल हैं, का अनुमान है कि इन स्वैप विंडो (Swap Windows) का कुल असर इससे कहीं ज़्यादा हो सकता है। कुल इनफ्लो के लिए मौजूदा अनुमान $80 बिलियन से $85 बिलियन के बीच है। इसमें से एक बड़ा हिस्सा अकेले FCNR(B) डिपॉजिट्स से आने की उम्मीद है, जिसका अनुमान $65 बिलियन से $70 बिलियन तक लगाया जा रहा है। यह केंद्रीय बैंक की विशेष योजनाओं पर ग्लोबल निवेशकों की मज़बूत प्रतिक्रिया को दर्शाता है।

रुपये और बाज़ार प्रवाह पर असर

यह इनफ्लो RBI के लिए करेंसी की अस्थिरता (Currency Volatility) को प्रबंधित करने का एक अहम ज़रिया है। हाल के दिनों में रुपया डॉलर के मुकाबले 95.9 के करीब कारोबार करते हुए दबाव में रहा है। इन फंडों को आकर्षित करके, केंद्रीय बैंक स्थिरता प्रदान करने का लक्ष्य रखता है। इन प्रयासों के साथ-साथ सरकारी नीतियों में बदलाव भी अहम भूमिका निभा रहे हैं, जैसे कि विदेशी निवेशकों को खास बॉन्ड निवेशों पर विदहोल्डिंग टैक्स (Withholding Tax) से छूट देना और कैपिटल गेन्स टैक्स (Capital Gains Tax) की संरचना में बदलाव। इन नीतिगत बदलावों ने बॉन्ड बाज़ार में पहले ही नतीजे दिखाना शुरू कर दिया है, जहाँ जून में $5.85 बिलियन और जुलाई में $2.71 बिलियन का इनफ्लो देखा गया।

इक्विटी बाज़ार और निवेश के रुझान

डेट मार्केट्स (Debt Markets) से परे, भारतीय इक्विटीज़ (Indian Equities) में भी नई दिलचस्पी देखी जा रही है। इस साल की शुरुआत में लगातार बिकवाली के दौर के बाद, विदेशी निवेशकों ने जुलाई में $1.57 बिलियन लाकर शुद्ध खरीदार (Net Buyers) का रुख किया। हालाँकि मई में फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के आंकड़ों में मामूली गिरावट देखी गई, गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि रुपया उचित मूल्यांकन (Reasonable Valuation) पर बना हुआ है। करेंसी में मजबूती की संभावना निवेशकों के लिए रुचि का विषय बनी हुई है, खासकर अगर क्षेत्रीय भू-राजनीतिक स्थितियाँ (Geopolitical Conditions) स्थिर होती हैं। आने वाले महीनों के लिए मुख्य निगरानी यह रहेगी कि इन विंडो के माध्यम से कुल कितना इनफ्लो अंतिम रूप लेता है और यह वैश्विक डॉलर की मज़बूती के मुकाबले रुपये को कितनी प्रभावी ढंग से स्थिर करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.