RBI का बड़ा एक्शन! ₹40 अरब की डील रोकी, रुपये को मिली मजबूती

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का बड़ा एक्शन! ₹40 अरब की डील रोकी, रुपये को मिली मजबूती
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए बैंकों को करीब **$40 अरब** के फॉरेन एक्सचेंज (FX) ट्रेड को वापस लेने पर मजबूर कर दिया है। 10 अप्रैल तक इन डील्स को खत्म करने का आदेश दिया गया था। RBI के नए नियमों का मकसद करेंसी मार्केट में चल रही वोलैटिलिटी (Volatility) को कम करना है।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

RBI का करेंसी मार्केट पर शिकंजा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े रूल्स के बाद, भारतीय रुपये में चल रहे बड़े आर्बिट्रेज ट्रेड का दौर लगभग खत्म हो गया है। सेंट्रल बैंक ने बैंकों की फॉरेन एक्सचेंज पोजीशन पर टाइट लिमिट्स लगाई हैं और ऑफशोर नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) कॉन्ट्रैक्ट्स तक पहुंच को ब्लॉक कर दिया है। इस कदम से बड़े प्लेयर्स को उन ट्रेड्स से बाहर निकलना पड़ा जो भारत और विदेशी बाजारों के बीच प्राइस डिफरेंस का फायदा उठा रहे थे। RBI का मुख्य लक्ष्य रुपये को स्टेबल करना और करेंसी की कीमतों में उतार-चढ़ाव को कंट्रोल करना है।

नए रूल्स: बैंक पोजीशंस और NDFs पर लगाम

10 अप्रैल, 2026 से लागू, बैंकों को अपने ऑनशोर (देश के अंदर) नेट ओपन रुपी पोजीशन को $100 मिलियन तक सीमित रखना होगा। यह पहले के इंटरनल लिमिट्स से काफी कम है, जो $1 बिलियन तक जा सकती थीं। RBI के 27 मार्च के डायरेक्टिव ने खासकर ऑनशोर मार्केट को डॉलर-सेटल NDFs से जोड़ने वाले आर्बिट्रेज ट्रेड्स को टारगेट किया। अनुमान है कि करीब $40 अरब की ऐसी पोजीशंस को क्लोज किया गया है। RBI ने ऑथराइज्ड डीलर्स को क्लाइंट्स के लिए रुपी NDFs ऑफर करने से भी रोक दिया है, जिससे ऑफशोर स्पेकुलेशन पर और लगाम लगी है। इस सख्ती का असर यह हुआ है कि डॉलर के मुकाबले रुपया, जो 95 के लेवल को छूने के करीब था, उसमें काफी रिकवरी आई है। एक साल के फॉरवर्ड प्रीमियम में भी गिरावट आई है, जो बताता है कि ज्यादातर पोजीशन एग्जिट हो चुकी हैं।

नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स (NDFs) क्या हैं?

नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स (NDFs) प्राइवेट एग्रीमेंट होते हैं, जहां एक तय फ्यूचर एक्सचेंज रेट और करंट रेट के बीच के अंतर से होने वाले प्रॉफिट या लॉस का भुगतान लोकल करेंसी की बजाय यूएस डॉलर जैसी प्रमुख करेंसी में किया जाता है। यह उन करेंसी के लिए आम है जिन पर कैपिटल कंट्रोल्स या कन्वर्जन लिमिट्स लागू होती हैं। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि इन आर्बिट्रेज ट्रेड्स के कारण हाल ही में "वोलैटिलिटी बढ़ी" थी और "कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव" आया था, जिसके चलते RBI को यह एक्शन लेना पड़ा। RBI का मानना है कि मार्केट को एक्सचेंज रेट तय करने देना चाहिए, लेकिन एक्सट्रीम मूव्स को कंट्रोल करने के लिए कदम उठाना चाहिए।

लागत और अप्रत्याशित जोखिम

हालांकि RBI के कड़े कंट्रोल से रुपया स्टेबल हुआ है, लेकिन इससे नए जोखिम भी पैदा हो गए हैं। क्लाइंट्स के लिए NDF ऑफर को बैन करने और बैंकों की ऑनशोर पोजीशन को कम करने से करेंसी मार्केट बंट सकता है। इससे ऑनशोर मार्केट में वोलैटिलिटी बढ़ सकती है, क्योंकि कई लोगों के लिए यह हेजिंग का एकमात्र जरिया बन सकता है। इस अचानक सख्ती का असर बैंक ट्रेजरी डिपार्टमेंट्स पर पड़ा है, अनुमान है कि सिस्टम-वाइड लॉसेस ₹3,000 करोड़ से ₹4,000 करोड़ तक हुए हैं। यह नुकसान रुपये में आई गिरावट के कारण पोजीशन के मार्केट वैल्यू में अनिवार्य एडजस्टमेंट से हुआ है। इसके अलावा, 30 मार्च को कॉर्पोरेट आर्बिट्रेज की एक लहर देखी गई, जहां कंपनियों ने बैंकों की पोजीशन एग्जिट करने के मौके का फायदा उठाया। उन्होंने $7 अरब से ज्यादा का NDF ट्रेड किया, जिससे रुपया रिकॉर्ड लो पर चला गया, जिसके बाद RBI ने और सख्ती की।

अस्थायी उपाय, दीर्घकालिक लक्ष्य

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि ये उपाय "खास मार्केट मूवमेंट्स पर प्रतिक्रिया" हैं, न कि "स्ट्रक्चरल बदलाव"। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये "हमेशा के लिए नहीं रहेंगे"। RBI ने फॉरेन एक्सचेंज मार्केट को डेवलप और डीप करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, साथ ही रुपये के इंटरनेशनल यूज को बढ़ावा देने का भी लक्ष्य रखा है। मार्केट अब RBI से इस बात के संकेत का इंतजार करेगा कि ये अस्थायी प्रतिबंध कब हटाए जा सकते हैं, जैसे ही स्थितियां सामान्य होंगी।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.