Reserve Bank of India एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। हालिया स्पेशल डिपॉजिट विंडो के जरिए बैंकिंग सिस्टम में **$133 बिलियन** का भारी कैश इनफ्लो आया है। बढ़ती महंगाई (**4.82%**) और कमजोर होते रुपये के बीच, मार्केट को डर है कि RBI लिक्विडिटी कंट्रोल करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।
चुनौती क्या है?
जून से अगस्त 2026 के बीच खुली स्पेशल डिपॉजिट विंडो के बाद सिस्टम में इतना पैसा आ गया है कि ओवरनाइट इंटरेस्ट रेट्स RBI के 5.25% के टारगेट से नीचे चले गए हैं। इसका सीधा मतलब है कि मार्केट में जरूरत से ज्यादा कैश (Liquidity) है, जिससे महंगाई के और भड़कने का खतरा पैदा हो गया है।
महंगाई और रुपये की मार
भारत की रिटेल इन्फ्लेशन अगस्त में 4.82% रही, जबकि रुपया डॉलर के मुकाबले 6% तक गिरकर 96 के स्तर के करीब ट्रेड कर रहा है। क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें इस दबाव को और बढ़ा रही हैं। RBI पहले ही ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की लिक्विडिटी बॉन्ड सेल के जरिए सोख चुका है, लेकिन इनफ्लो का आकार इतना बड़ा है कि इसे संभालना मुश्किल हो रहा है।
निवेशकों की नजर कहां हो?
अब सबकी निगाहें 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2026 के बीच होने वाली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक पर हैं। यदि RBI रेट हाइक का फैसला लेता है, तो यह स्पष्ट संदेश होगा कि बैंक अब विकास से ज्यादा महंगाई को कंट्रोल करने पर जोर दे रहे हैं। इसके अलावा, बॉन्ड यील्ड (Bond Yields) पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि इनमें हलचल बाजार में अस्थिरता बढ़ा सकती है।
