RBI की FCNR जमा योजना से भारत में आएंगे $85 बिलियन! फॉरेक्स रिजर्व में बंपर उछाल की उम्मीद

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AuthorMehul Desai|Published at:
RBI की FCNR जमा योजना से भारत में आएंगे $85 बिलियन! फॉरेक्स रिजर्व में बंपर उछाल की उम्मीद

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विशेष FCNR (B) जमा योजना के चलते भारत में विदेशी मुद्रा का भारी प्रवाह देखने को मिल रहा है। सरकारी बैंकों द्वारा आक्रामक तरीके से इन जमाओं को जुटाया जा रहा है, जिससे देश के फॉरेक्स रिजर्व में इस तिमाही के अंत तक **$80 से $85 बिलियन** तक की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।

Detailed Coverage

फॉरेक्स इनफ्लो में बड़ा उछाल

भारत इस समय विदेशी मुद्रा के बड़े प्रवाह का गवाह बन रहा है। फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) डिपॉजिट, ओवरसीज फॉरेन करेंसी बॉरोइंग और एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग के जरिए कुल इनफ्लो $80 बिलियन से $85 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। यह उछाल RBI द्वारा देश के फॉरेक्स रिजर्व को मजबूत करने के लिए उठाए गए रणनीतिक कदमों के बाद आया है।

केंद्रीय बैंक के 17 जुलाई तक के आंकड़ों के मुताबिक, FCNR(B) जमाओं का आंकड़ा $17.41 बिलियन को पार कर चुका है। अन्य उधारी को मिलाकर, जुलाई के मध्य तक कुल इनफ्लो $20.72 बिलियन तक पहुंच गया था। सरकारी बैंक (Public Sector Banks) इस जमा राशि को जुटाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जो 2013 में इसी तरह की योजनाओं के दौरान देखे गए स्तरों से कहीं अधिक मजबूत प्रतिक्रिया दर्शाता है।

फॉरेक्स रिजर्व पर असर

इन जमाओं में वृद्धि का भारत की फॉरेन करेंसी एसेट्स पर सीधा असर पड़ रहा है। 8 जून से 17 जुलाई के बीच इसमें $7.6 बिलियन की बढ़ोतरी हुई। इस प्रक्रिया में, बैंक लिक्विडिटी प्रबंधन के लिए इन विदेशी फंडों को RBI के साथ एक्सचेंज करते हैं। चूंकि FCNR(B) प्रवाह वर्तमान में कुल जुटाई गई राशि का लगभग 44% है, विशेषज्ञों का अनुमान है कि जुलाई के अंत तक फॉरेन करेंसी एसेट्स में $17 बिलियन से $20 बिलियन तक की और वृद्धि हो सकती है।

रिन्यूअल और ब्याज दरों की भूमिका

इस वृद्धि का एक प्रमुख कारण मौजूदा जमाओं का नवीनीकरण (Renewal) है। FCNR जमाओं की एक बड़ी मात्रा अगस्त और सितंबर के दौरान परिपक्व (Mature) होने वाली है। मौजूदा योजना पिछली अवधियों की तुलना में उच्च ब्याज दरें (Interest Rates) प्रदान कर रही है, इसलिए जमाकर्ता पूंजी निकालने के बजाय अपने फंड को नवीनीकृत करना पसंद कर रहे हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि यह रिन्यूअल चक्र, कर-कुशल (Tax-Efficient) क्षेत्राधिकारों से आने वाली पूंजी के साथ मिलकर, कुल इनफ्लो में $10 बिलियन और जोड़ सकता है।

निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

निवेशकों और बाजार पर्यवेक्षकों के लिए, सबसे महत्वपूर्ण बात भारत की बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (Balance of Payments) स्थिति का मजबूत होना और रुपये की स्थिरता पर इसका प्रभाव है। हालांकि उच्च इनफ्लो आम तौर पर वैश्विक अस्थिरता के मुकाबले स्थानीय मुद्रा को सहारा देते हैं, लेकिन इन प्रवाहों की स्थिरता वैश्विक ब्याज दर चक्र (Global Interest Rate Cycles) और बैंकों द्वारा आक्रामक जुटाव प्रयासों को जारी रखने की इच्छा पर निर्भर करेगी। तिमाही के शेष भाग के दौरान फॉरेक्स रिजर्व स्तरों पर RBI के आधिकारिक अपडेट इस बात का प्राथमिक संकेतक होंगे कि अनुमानित $85 बिलियन में से कितना सफलतापूर्वक वित्तीय प्रणाली के भीतर बना रहता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.