RBI FCNR डिपॉजिट स्कीम: ₹17 अरब का बंपर इनफ्लो! जानें कैसे RBI ने खींचा पैसा?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
RBI FCNR डिपॉजिट स्कीम: ₹17 अरब का बंपर इनफ्लो! जानें कैसे RBI ने खींचा पैसा?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की स्पेशल FCNR डिपॉजिट स्कीम ने कमाल कर दिया है। इस स्कीम के जरिए देश में **$17 अरब** से ज्यादा का विदेशी पैसा आया है। RBI ने बैंकों के लिए करेंसी का रिस्क खत्म कर दिया, जिससे NRI डिपॉजिटर्स को ज्यादा ब्याज मिल रहा है।

Detailed Coverage

RBI ने कैसे किया ये कमाल?

RBI की फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) डिपॉजिट स्कीम ने भारत के फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है। इस स्कीम का मकसद नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) को डॉलर डिपॉजिट के लिए लुभाना था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सितंबर में स्कीम की डेडलाइन नजदीक आने के साथ ही एक्सपर्ट्स की नजर इस बात पर है कि क्या ये इनफ्लो जारी रहेगा और रुपए को सपोर्ट करेगा।

RBI स्वैप फैसिलिटी का फंडा

इस स्कीम की सबसे खास बात यह है कि RBI खुद बैंकों के लिए करेंसी का रिस्क संभाल रहा है। मौजूदा स्वैप फैसिलिटी के तहत, RBI बैंकों को उनकी विदेशी करेंसी उसी समय के स्पॉट रेट पर एक्सचेंज करने की इजाजत देता है। बदले में, RBI गारंटी देता है कि जब डिपॉजिट मैच्योर होगी (आमतौर पर 3 से 5 साल), तो वह उसी रेट पर डॉलर वापस खरीद लेगा। इससे करेंसी के उतार-चढ़ाव का खतरा खत्म हो जाता है और बैंक बिना किसी नुकसान के डर के ज्यादा ब्याज दे पाते हैं।

ज्यादा रिटर्न के लिए लेवरेज का इस्तेमाल

कई डिपॉजिटर्स के लिए, यह स्कीम सिर्फ स्टैंडर्ड इंटरेस्ट रेट से कहीं बढ़कर है। कुछ बैंक ऐसे स्ट्रक्चर्ड प्रोडक्ट ऑफर कर रहे हैं, जिनमें डिपॉजिटर्स अपनी शुरुआती FCNR डिपॉजिट को कोलेटरल (गारंटी) के तौर पर इस्तेमाल करके कम ब्याज पर लोन ले सकते हैं। इस उधार लिए पैसे को दोबारा इन्वेस्ट करके, निवेशक एक लेवरेज पोजीशन बना सकते हैं। जहां बेसिक इंटरेस्ट रेट करीब 6.5% के आसपास हो सकता है, वहीं इस फाइनेंशियल स्ट्रेटेजी से सालाना रिटर्न डबल डिजिट में पहुंच सकता है। हालांकि, इसमें एक रिस्क यह है कि अगर उधार लिए गए कैपिटल पर ब्याज दरें डिपॉजिट की अवधि के दौरान काफी बढ़ जाती हैं, तो असल रिटर्न कम हो सकता है।

डोमेस्टिक सेविंग्स पर असर

FCNR स्कीम की सफलता यह भी दिखाती है कि विदेशी डिपॉजिटर्स को मिल रहे रिटर्न और भारत में रहने वाले आम सेविंग्स करने वालों के बीच एक बड़ी खाई बन गई है। भारत में फिलहाल फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर 6.5% के आसपास ही ब्याज मिल रहा है। इसके अलावा, कुछ विदेशी डिपॉजिट्स के विपरीत, डोमेस्टिक सेविंग्स पर कमाए गए ब्याज पर इनकम टैक्स लगता है। डोमेस्टिक इन्फ्लेशन को ध्यान में रखते हुए, लोकल सेविंग्स पर असली रिटर्न काफी कम है। इसी वजह से भारत में लोग पारंपरिक बैंक सेविंग्स से हटकर इक्विटी मार्केट और अन्य एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं, ताकि महंगाई को मात देने वाला रिटर्न पा सकें। बैंकिंग सेक्टर के लिए, यह देखना अहम होगा कि क्या ये विदेशी इनफ्लो फॉरेक्स पोजीशन को स्टेबल कर पाते हैं और स्कीम खत्म होने के बाद डोमेस्टिक रिटेल बैंकिंग सेगमेंट में लिक्विडिटी पर इसका क्या असर पड़ता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.