RBI के निशाने पर NBFCs के नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और बैंकों के बीच चले आ रहे एक नियामक अंतर (regulatory gap) को पाटने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, RBI अब NBFCs में मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (ED) जैसे शीर्ष पदों पर नियुक्ति और उनके वेतन (compensation) से जुड़े नियमों को बैंकों के बराबर लाने की योजना बना रही है।
बैंकों पर कड़े नियम, NBFCs को मिलती थी छूट
फिलहाल, प्राइवेट सेक्टर के बैंकों पर RBI के सख्त नियम लागू होते हैं। इनमें एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के लिए 15 साल की अधिकतम टेन्योर लिमिट, 70 साल की एज कैप और एग्जीक्यूटिव पे के लिए RBI की अनिवार्य मंजूरी शामिल है। इसके विपरीत, NBFCs, खासकर अपर-लेयर वाली कंपनियां, बोर्ड-लेवल पर टेन्योर, कंपंसेशन और पॉलिसी तय करने में अधिक स्वायत्तता (autonomy) के साथ काम कर रही थीं, जिसके लिए उन्हें केंद्रीय बैंक से मंजूरी लेने की जरूरत नहीं पड़ती थी।
टॉप लीडर्स के टेन्योर पर पड़ सकता है असर
मैक्वेरी (Macquarie) के विश्लेषकों का मानना है कि अगर RBI NBFCs के नियमों को बैंक रेगुलेशन के अनुरूप बनाती है, तो प्रमुख NBFCs को नेतृत्व उत्तराधिकार योजना (leadership succession planning) में तेजी लानी पड़ सकती है। Shriram Finance Ltd. के MD & CEO उमेश रेवांकर (Umesh Revankar) का 14 साल का टेन्योर अक्टूबर 2029 में समाप्त हो रहा है, जो नए निर्देशों से प्रभावित हो सकता है। इसी तरह, Bajaj Finance Ltd. के MD & CEO राजीव जैन (Rajeev Jain), जो वर्तमान में अपने पद पर 11 साल पूरे कर चुके हैं, उनका टेन्योर मार्च 2028 में समाप्त होगा और वह भी संभावित रूप से आगामी नियम परिवर्तनों के दायरे में आ सकते हैं।
बाजार की प्रतिक्रिया
नियामकीय बदलावों की इन संभावित खबरों ने बुधवार को बाजार में हलचल मचा दी। Nifty 50 पर Bajaj Finance Ltd. के शेयर सबसे बड़ी गिरावट वाले शेयरों में से एक रहे, जो 4.5% गिरकर ₹897 पर आ गए। Shriram Finance Ltd. के शेयर में भी 2.6% की गिरावट आई और यह ₹1,034.9 पर बंद हुआ। निवेशक अब RBI से इन संभावित समायोजनों के दायरे और समय को लेकर और अधिक जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
