RBI और ECB के बीच बढ़ा सहयोग
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) ने अपने 2015 के मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को रिन्यू किया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा और ECB प्रेसिडेंट क्रिस्टीन लैगार्ड ने बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) की मीटिंग्स के दौरान इस एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए। इस पैक्ट के तहत, दोनों सेंट्रल बैंक वित्तीय सेक्टर में बेहतर कोऑपरेशन, जानकारी शेयरिंग, पॉलिसी पर चर्चा और टेक्निकल मामलों पर मिलकर काम करेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में स्थिरता और बेहतर कोऑर्डिनेशन बढ़ाना है।
UPI-TIPS लिंक से पेमेंट लागत में बड़ी कमी की उम्मीद
इस बढ़े हुए सहयोग का एक अहम नतीजा क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट इंटीग्रेशन (Cross-Border Payment Integration) में देखने को मिल सकता है। भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को ECB के TARGET Instant Payment Settlement (TIPS) सिस्टम से जोड़ने का काम अब 'रियलाइजेशन फेज' (Realization Phase) में पहुंच गया है। इस पहल का लक्ष्य भारत और यूरोज़ोन के बीच होने वाले पेमेंट ट्रांजैक्शन की लागत को मौजूदा 3% से 7% से घटाकर 1% से भी कम लाना है, खासकर हाई-वॉल्यूम ट्रांजैक्शन के लिए। यह G20 के क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट को बेहतर बनाने के रोडमैप के अनुरूप है।
पुराने नियामक मतभेदों को दूर करने की कोशिश
यह नया सहयोग ऐसे समय में हुआ है जब दोनों रेगुलेटर्स के बीच कुछ नियामक (Regulatory) चुनौतियां भी थीं। अक्टूबर 2022 में, यूरोपियन सिक्योरिटीज एंड मार्केट्स अथॉरिटी (ESMA) ने भारत की छह सेंट्रल काउंटरपार्टीज़ (CCPs), जिसमें क्लियरिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (CCIL) भी शामिल थी, की पहचान (Recognition) वापस ले ली थी। ESMA ने कोऑपरेशन की कमी का हवाला दिया था, जिससे यूरोपियन बैंकों के लिए भारतीय मार्केट में ट्रेडिंग की कैपिटल चार्ज बढ़ गई थी। हालांकि, जनवरी 2026 में RBI और ESMA ने एक अलग MoU साइन किया था, जिससे CCIL जैसी भारतीय CCPs EU की पहचान के लिए फिर से अप्लाई कर सकें। यह नया RBI-ECB पैक्ट इन प्रयासों को और मजबूती देगा।
आगे की राह और चुनौतियां
इन पहलों की पूरी क्षमता हासिल करने में अभी भी कुछ चुनौतियां हैं। UPI-TIPS लिंक में विभिन्न रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML), नो योर कस्टमर (KYC) प्रोसीजर और मैसेजिंग स्टैंडर्ड को इंटीग्रेट करना एक जटिल काम है। सफल ऑपरेशन के लिए विस्तृत टेक्निकल इंटीग्रेशन, मजबूत रिस्क मैनेजमेंट और स्टेकहोल्डर की तत्परता जरूरी होगी।
मजबूत वित्तीय संबंधों की ओर बढ़ते कदम
RBI और ECB के बीच यह व्यापक समझौता, पेमेंट सिस्टम के बेहतर इंटीग्रेशन और पुराने नियामक मुद्दों के समाधान से भारत और यूरोज़ोन के बीच वित्तीय संबंधों को मजबूत करने की एक मजबूत नींव रखता है। जैसे-जैसे इंडिया-ईयू फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ा रहा है, कुशल और लागत-प्रभावी क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट मैकेनिज्म पर फोकस बढ़ रहा है। यह MoU वित्तीय प्रथाओं को सुसंगत बनाने, जोखिमों को कम करने और दोनों क्षेत्रों के लिए वित्तीय स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
