भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने एक अहम मसौदा जारी किया है, जिसके तहत अब कॉर्पोरेट संस्थाएं भी टर्म मनी मार्केट में पैसा लगा सकेंगी। यह वो बाज़ार है जो अभी तक सिर्फ बैंकों के लिए आरक्षित था। इस प्रस्ताव में कुछ नए फाइनेंशियल टूल्स (financial tools) और ट्रेडिंग के समय में बढ़ोतरी की भी बात है, जिसका मकसद बाजार में लिक्विडिटी (liquidity) और एफिशिएंसी (efficiency) बढ़ाना है।
क्या हुआ है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भारत के डेट (debt) और मनी मार्केट (money market) में भागीदारी बढ़ाने के लिए एक ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है। इस प्रस्ताव का एक मुख्य हिस्सा यह है कि अब कॉर्पोरेट संस्थाओं को 'टर्म मनी सेगमेंट' में भाग लेने की अनुमति दी जाएगी, जो वर्तमान में केवल बैंकों और प्राइमरी डीलर्स तक सीमित है। यह सेगमेंट 14 दिन से लेकर एक साल तक की अवधि के लिए असुरक्षित (unsecured) उधार से संबंधित है। अगर यह अंतिम रूप लेता है, तो कॉर्पोरेट्स को इस बाजार में उधार देने की अनुमति मिल जाएगी, जो 2021 में स्थापित कड़े नियमों से एक बड़ा बदलाव होगा।
बाजार के लिए क्यों है यह अहम?
भारतीय वित्तीय प्रणाली के लिए, यह कदम डेट मार्केट को अधिक सक्रिय और कुशल बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। अधिक प्रतिभागियों, विशेष रूप से कॉर्पोरेट्स को टर्म मनी सेगमेंट में अनुमति देकर, केंद्रीय बैंक बेहतर लिक्विडिटी (liquidity) बनाने का लक्ष्य रखता है। वित्तीय शब्दों में, इसका मतलब है कि कंपनियों के पास अपने अल्पकालिक नकदी प्रवाह (short-term cash flow) को प्रबंधित करने के लिए अधिक विकल्प हो सकते हैं। यह बेहतर प्राइस डिस्कवरी (price discovery) की संभावना भी खोलता है, क्योंकि प्रतिभागियों का एक व्यापक पूल आमतौर पर अधिक प्रतिस्पर्धी उधार और ऋण दरों की ओर ले जाता है।
NBFCs और डीलरों के लिए बदलाव
ड्राफ्ट गाइडलाइंस नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) और प्राइमरी डीलर्स को भी प्रभावित करती हैं। प्रस्ताव में कहा गया है कि सभी-इंडिया वित्तीय संस्थानों और NBFCs को मानक नियमों के तहत टर्म मनी मार्केट में उधार लेने और देने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, प्राइमरी डीलर्स के लिए, उधार की सीमा (borrowing cap) को मौजूदा 225% से बढ़ाकर उनके नेट ओन फंड (net owned funds) का 400% करने का प्रस्ताव है। इस नए ढांचे में, टर्म मनी और इंटर-कॉर्पोरेट डिपॉजिट (inter-corporate deposits) को एक साथ समूहीकृत किया जाएगा, जिससे इन संस्थाओं के लिए उधार लेने की संरचना सरल हो जाएगी।
नए फाइनेंशियल टूल्स और समय
RBI क्रेडिट डेरिवेटिव्स (credit derivatives) के क्षेत्र में 'टोटल रिटर्न स्वैप्स' (total return swaps) पेश करने की भी योजना बना रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो, एक टोटल रिटर्न स्वैप एक निवेशक को बॉन्ड का मालिक बने बिना ही बॉन्ड से रिटर्न प्राप्त करने की अनुमति देता है। यह मानक डिफॉल्ट स्वैप्स (default swaps) से अलग है, जो आमतौर पर केवल भुगतान विफलता (payment failure) के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने इन बाजारों के लिए ट्रेडिंग घंटों को शाम 7 बजे तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, जो मौजूदा शाम 5 बजे के समापन समय से एक बदलाव है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के शेड्यूल के साथ बेहतर तालमेल बिठाया जा सके।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
चूंकि ये मसौदा नियम हैं, इसलिए अंतिम कार्यान्वयन (implementation) और उद्योग प्रतिक्रिया (industry feedback) के बाद किए जाने वाले किसी भी बदलाव पर नजर रखनी होगी। निवेशकों को, विशेष रूप से बैंकिंग और NBFC क्षेत्रों पर नज़र रखने वालों को, यह देखना चाहिए कि ये परिवर्तन उधार की लागत (borrowing costs) और सिस्टम में समग्र लिक्विडिटी को कैसे प्रभावित करते हैं। इन बाजारों का विस्तार अंततः कॉर्पोरेट डेट (corporate debt) के लिए एक अधिक मजबूत वातावरण प्रदान कर सकता है, जो क्रेडिट-भारी व्यवसायों के लिए आने वाले महीनों में देखने के लिए एक महत्वपूर्ण कारक है।
