RBI के नए ड्राफ्ट से NBFCs में हड़कंप, Bajaj ग्रुप को ₹55,000 करोड़ का झटका

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AuthorMehul Desai|Published at:
RBI के नए ड्राफ्ट से NBFCs में हड़कंप, Bajaj ग्रुप को ₹55,000 करोड़ का झटका

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने NBFCs के लिए रिवॉल्विंग क्रेडिट (Revolving Credit) की सुविधा पर रोक लगाने का ड्राफ्ट नियम पेश किया है। इसके तहत NBFCs को फिक्स्ड टर्म लोन (Fixed Term Loans) की ओर बढ़ना होगा। इस खबर से NBFC शेयरों में भारी गिरावट आई, जिसमें Bajaj Finance और Bajaj Finserv का मार्केट कैप ₹55,000 करोड़ तक गिर गया। निवेशक इस संभावित बदलाव के असर का आकलन कर रहे हैं।

RBI के फैसले से NBFCs में मची खलबली

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के उधारी के तरीकों में बदलाव के लिए एक ड्राफ्ट अमेंडमेंट पेश किया है, जिससे बाजार में बड़ी हलचल मच गई है। 6 अगस्त 2026 को जारी किए गए प्रस्ताव में RBI ने NBFCs को रिवॉल्विंग क्रेडिट फैसिलिटीज (Revolving Credit Facilities) देने से रोकने का सुझाव दिया है। प्रस्तावित नियमों के तहत, NBFCs को अब टर्म लोन (Term Loans) की ओर बढ़ना होगा। ये वो क्रेडिट फैसिलिटीज होती हैं जिनमें एक फिक्स्ड प्रिंसिपल अमाउंट (Fixed Principal Amount) होता है और एक तय रीपेमेंट शेड्यूल (Repayment Schedule) होता है, जिसे चुकाने के बाद दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

Bajaj Finance और Finserv पर सबसे ज्यादा असर

इस डेवलपमेंट का असर 7 अगस्त 2026 को NBFC सेक्टर पर साफ दिखा, क्योंकि निवेशकों ने स्थापित बिजनेस मॉडल में संभावित गड़बड़ी पर अपनी प्रतिक्रिया दी। Bajaj Finance और इसकी पैरेंट कंपनी Bajaj Finserv इस बिकवाली का सबसे ज्यादा शिकार हुईं। इन दोनों कंपनियों का कंबाइंड मार्केट कैपिटलाइजेशन (Combined Market Capitalization) लगभग ₹55,000 करोड़ कम हो गया। Bajaj Finance के शेयरों में करीब 6% की गिरावट दर्ज की गई, जो इस बात की चिंता को दर्शाता है कि इस बदलाव का कंपनी के 'फ्लेक्सी-लोन' (Flexi-loan) ऑफर्स पर क्या असर पड़ सकता है, जो रिवॉल्विंग क्रेडिट लाइन्स के तौर पर काम करते हैं।

बाजार क्यों चिंतित है?

निवेशकों की मुख्य चिंता NBFC प्रोडक्ट्स की बनावट को लेकर है। अभी कई NBFCs ग्राहकों को क्रेडिट लाइन्स (Credit Lines) का इस्तेमाल करने की सुविधा देती हैं, जिन्हें निकाला जा सकता है, चुकाया जा सकता है और फिर से निकाला जा सकता है - यही रिवॉल्विंग क्रेडिट की परिभाषा है। यह मॉडल अक्सर एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ग्रोथ और कस्टमर रिटेंशन (Customer Retention) का एक बड़ा जरिया होता है। RBI का प्रस्ताव कहता है कि क्रेडिट फैसिलिटीज में फिक्स्ड प्रिंसिपल और प्री-डिटरमाइंड शेड्यूल होना चाहिए, जिससे इन लोन्स का 'रिवॉल्विंग' नेचर खत्म हो जाएगा। अगर यह लागू होता है, तो लोन ग्रोथ धीमी हो सकती है और इंटरेस्ट मार्जिन (Interest Margins) पर दबाव आ सकता है, क्योंकि NBFCs को अपने प्रोडक्ट ऑफरिंग्स को फिर से स्ट्रक्चर करना होगा।

इसके अलावा, टर्म लोन की ओर शिफ्ट होने से ग्राहक अनुभव (Customer Experience) में भी दिक्कत आ सकती है, क्योंकि उधारकर्ताओं के पास नई एप्लीकेशन के बिना अपनी क्रेडिट लिमिट का दोबारा इस्तेमाल करने की सुविधा नहीं रहेगी। हालांकि, ड्राफ्ट अमेंडमेंट में RBI द्वारा क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए विशेष रूप से अधिकृत NBFCs को छूट दी गई है, लेकिन कंज्यूमर लेंडिंग पोर्टफोलियो (Consumer Lending Portfolios) के बड़े हिस्से को, जो फ्लेक्सिबल क्रेडिट लाइन्स पर निर्भर करते हैं, अपने ऑपरेशंस को एडजस्ट करना होगा।

मौजूदा स्थिति और आगे के कदम

निवेशकों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि यह फिलहाल एक ड्राफ्ट प्रस्ताव है, न कि अंतिम नियम। RBI ने 28 अगस्त 2026 तक सार्वजनिक और स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन (Public and Stakeholder Consultation) के लिए विंडो खोल दी है। बाजार अब इस बात का इंतजार कर रहा है कि क्या रेगुलेटर (Regulator) कोई राहत देगा या इंडस्ट्री कोई वैकल्पिक समाधान पेश कर पाएगी जो क्रेडिट स्टैंडर्ड्स (Credit Standards) को लेकर सेंट्रल बैंक की चिंताओं को दूर कर सके।

आने वाले हफ्तों में निवेशकों के लिए मुख्य मॉनिटरबल (Monitorable) RBI की अंतिम अधिसूचना होगी। शेयरहोल्डर्स (Shareholders) संभवतः प्रमुख NBFCs के मैनेजमेंट से इस बारे में कमेंट्री ट्रैक करेंगे कि उनके पोर्टफोलियो का कितना हिस्सा रिवॉल्विंग क्रेडिट प्रोडक्ट्स के अधीन है और यदि प्रस्ताव मौजूदा स्वरूप में लागू होता है तो वे प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) बनाए रखने के लिए वैकल्पिक लेंडिंग स्ट्रक्चर्स (Lending Structures) के लिए तैयार हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.