RBI Draft Norms: NBFCs की क्रेडिट लाइन्स पर संकट, MSME सेक्टर में खलबली

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI Draft Norms: NBFCs की क्रेडिट लाइन्स पर संकट, MSME सेक्टर में खलबली

Reserve Bank of India (RBI) के नए ड्राफ्ट नियमों ने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। इसमें NBFCs द्वारा दी जाने वाली रिवॉल्विंग क्रेडिट फैसिलिटी पर रोक लगाने का प्रस्ताव है, जिसका Federation of Indian MSMEs (FISME) ने कड़ा विरोध किया है।

क्या है RBI का नया प्रस्ताव?

RBI ने 'Non-Banking Financial Companies (Credit Facilities) Amendment Directions, 2026' का एक ड्राफ्ट जारी किया है। इसका मुख्य उद्देश्य NBFCs द्वारा दी जाने वाली रिवॉल्विंग क्रेडिट फैसिलिटी को रिस्ट्रिक्ट करना है। अगर यह नियम लागू हुआ, तो NBFCs को इन फ्लेक्सिबल क्रेडिट प्रोडक्ट्स को अनिवार्य रूप से 'टर्म लोन' (Term Loans) में बदलना होगा।

क्यों विरोध कर रहा है MSME सेक्टर?

Federation of Indian MSMEs (FISME) का कहना है कि छोटे व्यवसायों के लिए रिवॉल्विंग क्रेडिट जीवन रेखा की तरह है। वे इसे क्रेडिट कार्ड लिमिट की तरह इस्तेमाल करते हैं, जिससे सप्लायर पेमेंट और इन्वेंट्री मैनेजमेंट जैसे रोजाना के काम आसानी से होते हैं। FISME के मुताबिक, अगर इसे टर्म लोन में बदला गया, तो अनावश्यक पेपरवर्क और प्रोसेसिंग कॉस्ट बढ़ेगी, जिससे छोटे उद्योगों की लिक्विडिटी पर बुरा असर पड़ेगा।

RBI की चिंता: 'लोन एवरग्रीनिंग'

रेगुलेटर का मानना है कि इस कदम से शैडो बैंकिंग सेक्टर के रिस्क को कम किया जा सकेगा। RBI को लंबे समय से 'लोन एवरग्रीनिंग' की चिंता है, जहां लेंडर खराब कर्ज को छिपाने के लिए बार-बार क्रेडिट को रोल ओवर करते रहते हैं। टर्म लोन में बदलाव लाने से NBFCs की बैलेंस शीट में ज्यादा पारदर्शिता और जवाबदेही आएगी।

निवेशकों और बाजार के लिए मतलब

कई NBFCs ने MSME सेक्टर में अपनी मजबूत जगह इन्हीं फ्लेक्सिबल प्रोडक्ट्स के जरिए बनाई है। इस बदलाव से उनके लोन मैनेजमेंट सिस्टम में भारी बदलाव करना पड़ सकता है और इंटरेस्ट रेट मॉडल को भी फिर से तैयार करना होगा। साथ ही, डर है कि अगर फॉर्मल लेंडिंग महंगी हुई, तो छोटे व्यवसायी अनरेगुलेटेड और इनफॉर्मल लेंडर्स के चंगुल में फंस सकते हैं।

अब सेक्टर की नजर 28 अगस्त 2026 की डेडलाइन पर है, जिस तक पब्लिक फीडबैक लिए जाएंगे। निवेशकों को अब RBI के फाइनल सर्कुलर का इंतजार है, जिससे साफ होगा कि क्या इसमें कोई छूट दी जाएगी या पूरा बिजनेस मॉडल बदलना पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.