RBI के डेप्युटी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने फाइनेंस इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के अंधाधुंध इस्तेमाल के खिलाफ एक कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि AI को जिस रफ्तार से अपनाया जा रहा है, वह इंडस्ट्री की इससे जुड़ी मुश्किलों को संभालने की क्षमता से कहीं आगे है। उनका मुख्य संदेश यह है कि मजबूत सुरक्षा उपायों के बिना, AI का इस्तेमाल मौजूदा असमानताओं को और बढ़ा सकता है और नई समस्याएं खड़ी कर सकता है। इसलिए, जरूरी है कि हम सिर्फ इनोवेशन पर ध्यान देने के बजाय इसके जिम्मेदार इस्तेमाल पर जोर दें।
RBI की नजर में मुख्य जोखिम:
स्वामीनाथन जे ने पांच अहम चिंताओं को उजागर किया: 'पूर्वाग्रह (bias) और अनुचित परिणाम', 'पारदर्शिता की कमी (opacity)', 'डेटा प्राइवेसी और उसका गलत इस्तेमाल', 'मॉडल रिस्क' और 'साइबर रिस्क'। ये सिर्फ थ्योरी की बातें नहीं हैं, बल्कि ये वास्तविक कमजोरियां हैं जिन पर दुनिया भर के रेगुलेटर तेजी से नजर रख रहे हैं। बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बोर्ड (FSB) ने भी AI से जुड़े सिस्टमिक रिस्क पर चिंता जताई है और केंद्रीय बैंकों से AI क्षमताएं बनाने तथा निगरानी बढ़ाने का आग्रह किया है। इसी तरह, यूके की हाउस ऑफ कॉमन्स ट्रेजरी कमेटी ने भी AI के लिए और कड़े नियमों की मांग की है, क्योंकि मौजूदा तरीके उपभोक्ताओं की सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
AI को अपनाने की रफ्तार और मार्केट वैल्यूएशन:
फाइनेंस सेक्टर AI को अपनाने वाले प्रमुख उद्योगों में से एक है। 2025 की शुरुआत तक, 54% संस्थानों ने AI का इस्तेमाल शुरू कर दिया था, जो अन्य उद्योगों से काफी ज्यादा है। 2027 तक AI में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट $97 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। अमेरिका में AI को अपनाने की दर और भी मजबूत है, जहां 65% संस्थान सक्रिय रूप से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं और निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इन एडवांसमेंट्स के पीछे मुख्य कारण एफिशिएंसी (efficiency) बढ़ाना है, जैसे कि फ्रॉड डिटेक्शन (fraud detection) में सुधार, जिससे 2026 तक ग्लोबल बैंकों को £9.6 बिलियन से ज्यादा की बचत होने की उम्मीद है।
हालांकि, इस तेजी से हो रहे इंटीग्रेशन में चुनौतियां भी हैं। एक बड़ी 'ट्रस्ट दुविधा' (trust dilemma) है: IDC के अनुसार, लगभग आधे बैंक या तो वैलिडेटेड AI का कम इस्तेमाल करते हैं या उन सिस्टम पर ज्यादा निर्भर हैं जिनका पर्याप्त परीक्षण और गवर्नेंस नहीं हुआ है। डाइवरसिफाइड बैंकों के लिए औसत P/E रेश्यो (Price-to-Earnings ratio) लगभग 14.42 है, और रीजनल बैंकों के लिए यह 13.21 है। ये वैल्यूएशन AI से जुड़े उभरते सिस्टमिक रिस्क को पूरी तरह से शायद कीमत नहीं दे रहे हों। उदाहरण के लिए, सिटी यूनियन बैंक का लगभग 15.2x का P/E रेश्यो अपने सेगमेंट के लिए सामान्य मार्केट वैल्यूएशन को दर्शाता है। लेकिन, AI रिस्क पर व्यापक रेगुलेटरी फोकस भविष्य में सेक्टर-व्यापी वैल्यूएशन को प्रभावित कर सकता है।
AI कैसे बढ़ा सकता है कमजोरियां:
AI की फाइनेंस में क्रांति लाने की क्षमता के बारे में चल रही चर्चाओं के साथ, इसके अंतर्निहित जोखिमों का एक महत्वपूर्ण मूल्यांकन भी जरूरी है। 'पूर्वाग्रह और अनुचित परिणाम' की चिंताएं विशेष रूप से गंभीर हैं। ऐतिहासिक डेटा पर प्रशिक्षित AI मॉडल अनजाने में अतीत के भेदभाव को बढ़ा सकते हैं, जिससे खासकर कमजोर आबादी के लिए अनुचित लेंडिंग (lending) निर्णय और वित्तीय बहिष्कार (financial exclusion) हो सकता है। 58% फाइनेंशियल फर्मों का मानना है कि AI अपनाने से पूर्वाग्रह और भेदभाव बढ़ेगा, जिससे यह प्रतिष्ठा (reputation) और कानूनी जोखिम पैदा करता है। इसके अलावा, कई AI मॉडल की 'ब्लैक बॉक्स' प्रकृति के कारण, उनके निर्णय लेने का लॉजिक अक्सर अस्पष्ट और समझाने या ऑडिट करने में मुश्किल होता है, जिससे 'सिस्टमिक मॉडल रिस्क' पैदा होता है। पारदर्शिता की यह कमी रेगुलेटरी अनुपालन (compliance) को कमजोर कर सकती है और भरोसे को खत्म कर सकती है। साइबर खतरे भी बढ़ रहे हैं, AI उन्नत फ्रॉड, सिंथेटिक पहचान (synthetic identity) बनाने और ऐसे AI-संचालित फिशिंग हमलों को सक्षम कर रहा है जो पारंपरिक सुरक्षा को भेद देते हैं। AI कोऑर्डिनेटेड एल्गोरिथम ट्रेडिंग (algorithmic trading) के माध्यम से बाजार में हेरफेर (manipulation) और अस्थिरता (volatility) को भी सक्षम कर सकता है, जो एक और सिस्टमिक रिस्क है। बैंकिंग सेक्टर का AI में भारी निवेश, जिसके 2028 में वैश्विक खर्च का 20% होने का अनुमान है, एक देनदारी (liability) बन सकता है यदि इन जोखिमों को सक्रिय रूप से प्रबंधित नहीं किया गया। इससे उन लोगों के बीच 'AI-गैप' बढ़ सकता है जो उन्नत AI अपना रहे हैं और जो इसके लिए तैयार नहीं हैं।
इनोवेशन और जोखिम प्रबंधन में संतुलन:
फाइनेंस में AI का भविष्य इनोवेशन और मजबूत जोखिम प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने पर निर्भर करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक का 'फ्रेमवर्क फॉर रिस्पॉन्सिबल एंड एथिकल इनेबलमेंट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (FREE-AI)' और इसी तरह की वैश्विक पहलें AI डिप्लॉयमेंट के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित करने का लक्ष्य रखती हैं, जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही (accountability) और निष्पक्षता पर जोर दिया गया है। इंडस्ट्री एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अगले तीन से पांच साल यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कौन सी वित्तीय संस्थाएं अपने जोखिमों को प्रबंधित करते हुए AI का सफलतापूर्वक उपयोग करके स्थायी लाभ हासिल कर पाएंगी। फोकस केवल प्रयोग (experimentation) से हटकर प्रदर्शन (performance) पर केंद्रित हो रहा है, जिसके लिए एकीकृत गवर्नेंस फ्रेमवर्क की आवश्यकता है जो AI रणनीति को समग्र व्यावसायिक उद्देश्यों और रेगुलेटरी अपेक्षाओं के साथ संरेखित करें।