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RBI का बड़ा फैसला: ब्रोकरेज को मिली राहत, पर अनिश्चितता अभी भी बाकी

BANKINGFINANCE
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AuthorNeha Patil|Published at:
RBI का बड़ा फैसला: ब्रोकरेज को मिली राहत, पर अनिश्चितता अभी भी बाकी
Overview

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने कैपिटल मार्केट्स से जुड़े नए नियमों को लागू करने की समय-सीमा को **तीन महीने** के लिए बढ़ाकर **1 जुलाई** कर दिया है। इससे डोमेस्टिक स्टॉक ब्रोकर्स को प्रोपराइटरी ट्रेडिंग और सिक्योरिटीज पर लोन के संबंध में सख्त रेगुलेशन से अस्थायी राहत मिली है, हालांकि अंतिम नियमों के असर को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

RBI ने बढ़ाई नियमों के अमल की डेडलाइन

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने नए कैपिटल मार्केट एक्सपोजर रूल्स को लागू करने की डेडलाइन 1 अप्रैल से बढ़ाकर 1 जुलाई, 2026 कर दी है। यह फैसला डोमेस्टिक स्टॉक ब्रोकर्स और अन्य कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (CMIs) के लिए एक स्वागत योग्य, हालांकि अस्थायी, राहत लेकर आया है।

क्या थे सख्त मूल नियम?

फरवरी में पेश किए गए मूल नियमों का मकसद लोन देने के तरीकों को और सख्त बनाना था। इसमें बैंकों को ब्रोकर्स के प्रोपराइटरी ट्रेडिंग डेस्क को फाइनेंस करने से रोकना, कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरीज (CMIs) को दिए जाने वाले सभी क्रेडिट के लिए 100% कोलेटरल की मांग करना, और इक्विटी कोलेटरल पर 'हेयरकट' को 25% से बढ़ाकर कम से कम 40% करना शामिल था। 'हेयरकट' कोलेटरल के मार्केट वैल्यू पर लागू की जाने वाली छूट है। इन उपायों का उद्देश्य प्रोपराइटरी डेस्क के लिए लिवरेज को कम करना था, जिससे वे आंतरिक पूंजी पर अधिक निर्भर हो सकें और फंडिंग कॉस्ट बढ़ जाए।

इंडस्ट्री ने मांगी थी स्पष्टता और एडजस्टमेंट

स्टॉक ब्रोकर्स और बैंकों सहित इंडस्ट्री ग्रुप्स ने ऑपरेशनल और इंटरप्रिटेशन इश्यूज पर चिंता जताई थी, जिसके कारण RBI ने यह देरी की। एसोसिएशन ऑफ NSE मेंबर्स ऑफ इंडिया (Anmi) और 5paisa Capital के प्रतिनिधियों ने आगे की कंसल्टेशन और ऑपरेशनल एडजस्टमेंट के लिए इस एक्सटेंशन का स्वागत किया। हालांकि, मुख्य चिंताएं, विशेष रूप से प्रोपराइटरी ट्रेडिंग पर प्रतिबंध और कोलेटरल की आवश्यकताओं को लेकर, बनी हुई हैं।

RBI ने दी खास स्पष्टता और छूट

डेडलाइन बढ़ाने के साथ-साथ, RBI ने कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण दिया और कुछ छूट भी पेश की। इनमें मार्केट मेकर्स को उनके ऑपरेशंस में इस्तेमाल की गई सिक्योरिटीज के एवज में फाइनेंस करने पर बैंकों के प्रतिबंधों को हटाना शामिल है। इसने नॉन-डेट म्यूचुअल फंड के लिए विशेष इंट्राडे फैसिलिटीज को भी इन कैपिटल मार्केट एक्सपोजर रूल्स से बाहर परिभाषित किया है।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए अनिश्चितता बनी हुई है

स्थगन और आंशिक छूट के बावजूद, SAMCO Securities जैसे मार्केट पार्टिसिपेंट्स जोर देते हैं कि मुख्य चिंताएं अभी भी अनसुलझी हैं। RBI इन महत्वपूर्ण कैपिटल मार्केट रेगुलेशन पर अपनी स्थिति को अंतिम रूप नहीं देता, तब तक मार्केट अनिश्चितता के साथ काम कर रहा है।

Disclaimer:This content is for informational purposes only and does not constitute financial or investment advice. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making decisions. Investments are subject to market risks, and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors are not liable for any losses. Accuracy and completeness are not guaranteed, and views expressed may not reflect the publication’s editorial stance.