RBI Data: बैंकों से बाहर निकला ₹5.19 लाख करोड़ का फंड, लिक्विडिटी में बड़ी गिरावट

BANKINGFINANCE
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
RBI Data: बैंकों से बाहर निकला ₹5.19 लाख करोड़ का फंड, लिक्विडिटी में बड़ी गिरावट

देश के बैंकिंग सिस्टम में अक्टूबर के मध्य में नकदी की भारी किल्लत देखने को मिली है। RBI के डेटा के मुताबिक, बैंक डिपॉजिट में ₹5.19 लाख करोड़ की बड़ी गिरावट आई है, जिसका सीधा असर क्रेडिट ग्रोथ पर भी पड़ा है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 15 अक्टूबर, 2026 तक के जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, घरेलू बैंकिंग सेक्टर एक कूलिंग फेज से गुजर रहा है। बैंकों में डिपॉजिट आउटफ्लो ₹5.19 लाख करोड़ रहा, जो पिछले दौर की तुलना में काफी ज्यादा है। वहीं, सिस्टम में आउटस्टैंडिंग क्रेडिट में भी ₹2.52 लाख करोड़ की कमी दर्ज की गई है।

आंकड़ों में गिरावट और असर

इन आंकड़ों में गिरावट के चलते ग्रोथ रेट्स भी धीमी हुई हैं। बैंकिंग सेक्टर की क्रेडिट ग्रोथ पिछले पखवाड़े के 19.4% से घटकर 18.2% पर आ गई है। इसी तरह, डिपॉजिट ग्रोथ भी 17.8% से फिसलकर 16.7% हो गई है। वर्तमान में, सिस्टम में कुल आउटस्टैंडिंग डिपॉजिट ₹278.76 लाख करोड़ है, जबकि कुल लोन वितरण यानी क्रेडिट ₹227.43 लाख करोड़ है।

लिक्विडिटी का प्रभाव और निवेशकों के लिए संकेत

हालांकि, क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो (Credit-to-Deposit Ratio) 81.59% पर स्थिर बना हुआ है, जो दर्शाता है कि बैंकों ने नकदी की अचानक कमी के बावजूद संतुलन बनाए रखा है। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि लिक्विडिटी का दबाव बैंकों को डिपॉजिट जुटाने के लिए अधिक आक्रामक बना सकता है। इससे ग्राहकों को तो ज्यादा ब्याज दर मिल सकती है, लेकिन बैंकों के नेट प्रॉफिट मार्जिन (Net Profit Margins) पर दबाव बढ़ सकता है।

आगे की राह

फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या डिपॉजिट में यह गिरावट एक अस्थायी मौसमी बदलाव है या फिर पैसा पारंपरिक बैंकिंग से बाहर अन्य निवेश साधनों की ओर शिफ्ट हो रहा है। निवेशकों को आने वाले दिनों में बैंकों के तिमाही नतीजों पर नजर रखनी चाहिए, जिससे फंड की लागत और लोन की मांग के बारे में बेहतर स्थिति साफ हो सकेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.