RBI डेटा: जून 2026 तक भारतीय बैंकों के लोन में **19.2%** की बंपर ग्रोथ!

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AuthorAditya Rao|Published at:
RBI डेटा: जून 2026 तक भारतीय बैंकों के लोन में **19.2%** की बंपर ग्रोथ!

RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक भारतीय बैंकों के कुल क्रेडिट में सालाना आधार पर **19.2%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मीडियम एंटरप्राइजेज को दिए जाने वाले लोन में **30%** की उछाल और पेट्रोलियम सेक्टर में मजबूत मांग इस ग्रोथ के मुख्य कारण रहे। पर्सनल लोन **16%** बढ़े, लेकिन क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि की ग्रोथ घटकर **2%** रह गई।

इंडस्ट्री और सेक्टर की डिमांड

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया आंकड़े बताते हैं कि जून 2026 तक भारतीय बैंकिंग सिस्टम में क्रेडिट ग्रोथ (Credit Growth) में तेज उछाल आया है। कुल इंडस्ट्रियल क्रेडिट (Industrial Credit) में सालाना आधार पर 19.2% का इजाफा हुआ है, जो बिजनेस की उधारी में मजबूत रिकवरी का संकेत है। यह ग्रोथ खास तौर पर अलग-अलग साइज के बिजनेसेस में देखी गई है, जिसमें मीडियम साइज की कंपनियों ने 30% की बढ़त दर्ज की, जो पिछले साल के 13% के मुकाबले काफी ज्यादा है।

बड़े उद्योगों की बढ़ी उधारी

बड़े उद्योगों की बोरिंग (Borrowing) में भी सुधार दिखा, क्रेडिट ग्रोथ पिछले साल के सिर्फ 2% से बढ़कर 17% पर पहुंच गई। इंडस्ट्रियल सेक्टर में पूंजी की मांग खास तौर पर हाई-ग्रोथ वाले सेगमेंट्स से प्रभावित हुई। पेट्रोलियम, कोल और न्यूक्लियर फ्यूल सेक्टर्स को दिए जाने वाले लोन में 49% का उछाल आया, जबकि जेम्स और जूलरी सेक्टर में 33% की बढ़त देखी गई। इंजीनियरिंग और फूड प्रोसेसिंग जैसे अन्य प्रमुख सेगमेंट्स ने भी इस मोमेंटम को बनाए रखा, जिनमें क्रेडिट ग्रोथ क्रमशः 38% और 20% दर्ज की गई।

पर्सनल लेंडिंग में बदलाव

रिटेल बॉरोइंग (Retail Borrowing) बैंकों के लिए एक बड़ा बूस्टर बनी हुई है, हालांकि इसकी रफ्तार और फोकस में कुछ बदलाव आए हैं। पर्सनल लोन में सालाना आधार पर 16% की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछली अवधि के 12% से अधिक है। डेटा में एक खास बात गोल्ड ज्वैलरी के बदले दिए गए लोन में 93% की ग्रोथ है, हालांकि इस कैटेगरी में अक्सर एग्री-क्रेडिट (Agri-credit) भी शामिल होता है। वहीं, हाई-इंटरेस्ट वाले रिटेल सेगमेंट्स में नरमी के संकेत मिल रहे हैं। क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग (Credit Card Outstanding) में ग्रोथ घटकर 2% रह गई है, जो पिछले साल 7% थी। यह कंज्यूमर स्पेंडिंग बिहेवियर में बदलाव या बैंकों द्वारा ज्यादा सावधानी बरतने का संकेत हो सकता है।

फाइनेंशियल सर्विसेज और NBFCs

सर्विसेज सेक्टर में कुल क्रेडिट एक्सपेंशन 21% रहा। इस सेगमेंट में एक बड़ा हाइलाइट नॉन-बैंकिंग फाइनेंसियल कंपनीज (NBFCs) को दिए जाने वाले लोन में 32% की सालाना बढ़ोतरी है, जो पिछले साल के 3% ग्रोथ के मुकाबले काफी बड़ा जम्प है। RBI के अनुसार, यह तेजी मुख्य रूप से पब्लिक फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को दिए जाने वाले लोन में बढ़ोतरी से जुड़ी है। इन्वेस्टर्स के लिए, यह बदलाव बताता है कि बैंक NBFCs में अपना एक्सपोजर बढ़ा रहे हैं, जिससे सिस्टमैटिक रिस्क (Systematic Risk) बढ़ सकता है अगर उन कंपनियों को लिक्विडिटी (Liquidity) या एसेट क्वालिटी (Asset Quality) की समस्या का सामना करना पड़े।

इनवेस्टर्स को आने वाले तिमाहियों में क्रेडिट ग्रोथ की इस रफ्तार को बनाए रखने पर नजर रखनी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि नए लोन पोर्टफोलियो की एसेट क्वालिटी (Asset Quality) का ट्रेंड कैसा रहता है, खासकर NBFC लेंडिंग और पर्सनल लोन जैसे सेगमेंट्स में। जैसे-जैसे बैंक अपने बैलेंस शीट का विस्तार कर रहे हैं, उनके नेट इंटरेस्ट मार्जिन (Net Interest Margins) और प्रोविजन रिक्वायरमेंट्स (Provision Requirements) पर पड़ने वाले प्रभाव को भविष्य के क्वार्टरली रिजल्ट्स में ट्रैक करना अहम होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.