15 अगस्त 2026 को खत्म हुए पखवाड़े में देश के बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट और डिपॉजिट में गिरावट दर्ज की गई है। बैंक क्रेडिट में **₹70,639 करोड़** की कमी आई है, जबकि निवेशक **31 अगस्त** को बंद होने जा रही RBI की FCNR(B) स्वैप विंडो पर अपनी नजरें जमाए हुए हैं।
क्रेडिट ग्रोथ में आई कमी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 15 अगस्त, 2026 तक के पखवाड़े में बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट और डिपॉजिट दोनों में ही गिरावट देखने को मिली है। इस दौरान आउटस्टैंडिंग डिपॉजिट ₹6,534 करोड़ घटकर ₹269.31 लाख करोड़ रह गया, जबकि क्रेडिट ऑफटेक ₹70,639 करोड़ गिरकर ₹220.08 लाख करोड़ पर आ गया। सालाना आधार पर क्रेडिट ग्रोथ भी 19.3% से घटकर 18.3% पर आ गई है, जो कॉरपोरेट और रिटेल ग्राहकों की सतर्कता को दर्शाता है।
मार्जिन पर बढ़ सकता है दबाव
अब निवेशकों की निगाहें 31 अगस्त, 2026 पर टिकी हैं, क्योंकि इस दिन RBI की रियायती FCNR(B) डिपॉजिट स्वैप विंडो बंद होने वाली है। अब तक कई बैंकों ने लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए इस सुविधा का फायदा उठाया था।
इस विंडो के बंद होने से बैंकों को दोबारा डोमेस्टिक फंडिंग, जैसे कि सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CDs) का रुख करना पड़ सकता है, जो विदेशी फंड्स के मुकाबले महंगे होते हैं। एनालिस्ट्स का मानना है कि इस बदलाव से बैंकों के नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIMs) में 3 से 15 बेसिस पॉइंट्स की गिरावट आ सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैंक अपनी प्रॉफिटेबिलिटी को बचाने के लिए डिपॉजिट और लोन की दरों में किस तरह के बदलाव करते हैं।
