RBI ने अपनी FCNR(B) स्वैप सुविधा को तय समय से एक महीने पहले ही **31 अगस्त, 2026** को बंद कर दिया है। इस प्रोग्राम के जरिए कंपनी ने **$52 बिलियन** से अधिक की राशि जुटाई, जिससे सरकारी खजाने को **₹58,372 करोड़** का बड़ा मुनाफा हुआ है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Foreign Currency Non-Resident (FCNR) डिपॉजिट्स के लिए अपनी स्पेशल स्वैप सुविधा को समय से पहले ही समेट लिया है। इस कदम के साथ ही केंद्रीय बैंक ने फॉरेक्स रिजर्व को मजबूती दी है और बैंकिंग सेक्टर में लिक्विडिटी की कमी को दूर किया है।\n\n### कैसे हुआ करोड़ों का मुनाफा?\n\nयह मैकेनिज्म बैंकों को विदेश से फॉरेन करेंसी डिपॉजिट लाने की अनुमति देता था, जहाँ करेंसी में उतार-चढ़ाव (hedging) की लागत का जिम्मा RBI उठाता था। इस प्रोसेस में डॉलर को इन्वेस्ट करके RBI ने हेजिंग की लागत से ज्यादा कमाई की, जिससे ₹58,372 करोड़ का सरप्लस जनरेट हुआ।\n\n### बैंकिंग सेक्टर पर क्या असर होगा?\n\nयह सुविधा बैंकिंग सेक्टर के लिए एक बड़े बूस्टर की तरह थी, जिसने सिस्टम में करीब ₹12 ट्रिलियन की लिक्विडिटी इंजेक्ट की थी। इससे बैंकों को अपने क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेशियो को मैनेज करने में काफी मदद मिली।\n\n### आगे क्या चुनौतियां हैं?\n\nविंडो के बंद होने के बाद अब नजरें इस पर हैं कि RBI लिक्विडिटी नॉर्मलाइजेशन कैसे करेगा। महंगाई पर लगाम लगाने और बाजार में नकदी के संतुलन के लिए केंद्रीय बैंक अब Cash Reserve Ratio (CRR) में बदलाव, Variable Rate Reverse Repo नीलामी या Open Market Operations जैसे हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है। निवेशकों के लिए अब बैंकिंग स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव और ब्याज दरों के ट्रेंड पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।
