RBI ने सरकारी लेंडर्स Power Finance Corporation (PFC) और REC के मर्जर को अपनी मंजूरी दे दी है। इस रेगुलेटरी क्लियरेंस के बाद अब देश में **₹11 लाख करोड़** से ज्यादा के लोन बुक वाली एक विशाल पावर फाइनेंसिंग संस्था बनने का रास्ता साफ हो गया है।
RBI से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिलने के बाद अब PFC और REC का एक होना लगभग तय हो गया है। यह मर्जर पावर सेक्टर की फाइनेंसिंग के लिहाज से एक गेम-चेंजर साबित होगा, क्योंकि इससे बनने वाली नई एंटिटी का लोन बुक ₹11 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगा, जिससे पावर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फंड करने में एक नई ताकत मिलेगी।
शेयर स्वैप (Share Swap) का गणित
डीलर की शर्तों के मुताबिक, शेयर एक्सचेंज रेश्यो वही रहेगा जिसे पहले बोर्ड ने तय किया था। समझौते के तहत, REC के हर 100 शेयरों के बदले निवेशकों को PFC के 88 इक्विटी शेयर मिलेंगे। यह फैसला फाइनेंशियल एडवाइजर्स द्वारा तैयार किए गए वैल्युएशन और फेयरनेस ओपिनियन के आधार पर लिया गया है।
रिस्क और आगे की राह
RBI की मंजूरी के बावजूद अभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं बाकी हैं। अब मैनेजमेंट को शेयरहोल्डर्स और क्रेडिटर्स की मंजूरी हासिल करनी होगी। दो बड़ी कंपनियों का एक साथ आना एग्जीक्यूशन रिस्क पैदा कर सकता है। चूंकि, RBI अब बड़ी NBFCs पर नजर सख्त कर रहा है, इसलिए नई संस्था को अपनी एसेट क्वालिटी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
निवेशकों के लिए नेक्स्ट स्टेप
मर्जर की आखिरी तारीख अब पेंडिंग स्टेट्यूटरी फाइलिंग्स और कानूनी मंजूरी पर टिकी है। जून 2026 में दोनों कंपनियों के बोर्ड्स ने इसे मंजूरी दी थी। अब निवेशकों की नजर शेयरहोल्डर और क्रेडिटर मीटिंग्स के शेड्यूल पर होनी चाहिए। यही वह अगला महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहाँ से मर्जर की फाइनल टाइमलाइन स्पष्ट होगी।
