भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने NBFCs के लिए क्रेडिट नियमों के ड्राफ्ट पर बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। RBI ने साफ किया है कि इन नियमों का मकसद जोखिम प्रबंधन (Risk Management) है, न कि मौजूदा कारोबार को रोकना। वहीं, UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर अभी भी चर्चाएं जारी हैं।
NBFC क्रेडिट नियम: RBI का बड़ा अपडेट
RBI के डिप्टी गवर्नर शिरिष चंद्र मुर्मू ने NBFCs के लिए प्रस्तावित 'नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC – क्रेडिट फैसिलिटीज) अमेंडमेंट डायरेक्शन्स, 2026' पर चिंताएं दूर की हैं। इस ड्राफ्ट के अनुसार, NBFCs केवल टर्म लोन (Term Loan) ही दे पाएंगी, और रिवॉल्विंग क्रेडिट (Revolving Credit) प्रोडक्ट्स को बंद करने का प्रस्ताव था, खासकर उन एंटिटीज के लिए जिनके पास क्रेडिट कार्ड जारी करने का अधिकार नहीं है।
लेकिन, डिप्टी गवर्नर ने जोर देकर कहा कि RBI का मुख्य उद्देश्य बिजनेस में उचित जोखिम प्रबंधन (Risk Oversight) सुनिश्चित करना है, न कि मौजूदा लेंडिंग प्रैक्टिसेस को बंद करना। RBI ने रेगुलेटेड एंटिटीज (Regulated Entities) और अन्य हितधारकों से 28 अगस्त, 2026 तक फीडबैक मांगा है। निवेशकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि अंतिम नियम NBFCs की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी (Operational Flexibility) और प्रोडक्ट रेंज को प्रभावित कर सकते हैं।
UPI MDR का क्या होगा?
UPI पेमेंट सिस्टम की बात करें तो, RBI ने पुष्टि की है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क अभी भी विचाराधीन है। हाल ही में आए 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026' ने कुछ UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने का कानूनी आधार तो तैयार कर दिया है, लेकिन अभी तक कोई खास रेट, मर्चेंट कैटेगरी या लागू होने की तारीख तय नहीं हुई है।
RBI और सरकार नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के साथ मिलकर इस फ्रेमवर्क की संरचना पर चर्चा कर रहे हैं। डिजिटल पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (Digital Payment Service Providers) और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स (Fintech Platforms) के निवेशकों को इन चर्चाओं पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि MDR का लागू होना पेमेंट प्रोसेसर्स के रेवेन्यू मॉडल और बड़े मर्चेंट्स के लिए कॉस्ट स्ट्रक्चर (Cost Structure) पर बड़ा असर डाल सकता है।
निवेशकों को इन पर नजर रखनी चाहिए:
- NBFC गाइडलाइन्स: 28 अगस्त, 2026 के बाद फाइनल होने वाले NBFC नियमों पर नजर रखें। अगर ड्राफ्ट के अनुसार नियम लागू होते हैं, तो क्रेडिट कार्ड लाइसेंस के बिना NBFCs को अपने प्रोडक्ट ऑफरिंग्स में बदलाव करना पड़ सकता है।
- UPI MDR फ्रेमवर्क: पेमेंट फ्रंट पर, UPI MDR फ्रेमवर्क पर स्पष्टता का इंतजार रहेगा। ट्रांजैक्शन फीस (Transaction Fees) या मर्चेंट कैटेगरी पर कोई भी अपडेट डिजिटल पेमेंट सेक्टर की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) के लिए एक बड़ा संकेत होगा।
