MSME सेक्टर को बड़ी राहत: लोन की लिमिट दोगुना, मिलेगी मजबूती
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSMEs) के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। RBI ने MSME सेक्टर के लिए कोलेटरल-फ्री (बिना किसी गारंटी या गिरवी रखे) लोन की सीमा को ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख करने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम छोटे और मध्यम उद्योगों को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम से आसानी से लोन दिलाने में मदद करेगा, जिससे वे अपनी जरूरतें पूरी कर सकें और अनौपचारिक (informal) और महंगे कर्ज पर निर्भरता कम कर सकें।
MSMEs भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, जो GDP का लगभग 30% और निर्यात का करीब 45% हिस्सा योगदान करते हैं। हालांकि, इस सेक्टर के लिए वित्तपोषण (financing) की जरूरतें बहुत बड़ी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में MSMEs के लिए क्रेडिट गैप (कर्ज की कमी) लगभग ₹25 से ₹30 लाख करोड़ (या $530 बिलियन) का है। मौजूदा ₹10 लाख की कोलेटरल-फ्री लोन सीमा, जो 2010 में तय की गई थी, अब इस विशाल जरूरत को पूरा करने के लिए काफी नहीं थी। इस नई सीमा से एमएसएमई कंपनियों को विस्तार करने, वर्किंग कैपिटल की व्यवस्था करने और अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज (CGTMSE) जैसी योजनाएं भी एमएसएमई को गारंटीड लोन दिलाने में अहम भूमिका निभाती हैं, और इस प्रस्ताव से ऐसी योजनाओं का लाभ और बढ़ेगा।
रेपो रेट स्थिर: ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन
MSME सेक्टर को बूस्ट देने के साथ-साथ, RBI ने अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने प्रमुख ब्याज दर, यानी रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। यह फैसला 'न्यूट्रल' (तटस्थ) मॉनेटरी पॉलिसी स्टैंस का हिस्सा है, जिसका मतलब है कि RBI महंगाई को काबू में रखते हुए आर्थिक ग्रोथ को सहारा देने की कोशिश कर रहा है। RBI ने 2025 की शुरुआत से कुल 1.25% की कटौती करके ब्याज दरों को कम किया था, और अब यह 'पॉज' (pause) आगे की समीक्षा के लिए है।
RBI का अनुमान है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में खुदरा महंगाई (CPI inflation) 2.1% के निचले स्तर पर रह सकती है, जो RBI के लक्ष्य बैंड के भीतर है। वहीं, GDP ग्रोथ का अनुमान 7.4% के आसपास रहने की उम्मीद है, जो एक मजबूत आर्थिक रिकवरी का संकेत देता है। इस स्थिर ब्याज दर माहौल से लोन की लागत नियंत्रण में रहेगी और लोग व कंपनियां निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे।
आगे की राह: विकास को बढ़ावा, जोखिम पर नजर
RBI की यह दोहरी रणनीति – MSMEs के लिए क्रेडिट की उपलब्धता बढ़ाना और साथ ही ब्याज दरों को स्थिर रखना – अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और विकास को गति देने के लिए एक सुनियोजित तरीका है। जानकारों का मानना है कि कोलेटरल-फ्री लोन की बढ़ी हुई सीमा से बाजार में लिक्विडिटी (पूंजी) बढ़ेगी, जिससे विभिन्न उद्योगों को फायदा होगा और निजी पूंजीगत व्यय (private capital expenditure) में भी तेजी आ सकती है।
यह देखना अहम होगा कि इस कदम से MSMEs के लिए कितना कर्ज उपलब्ध होता है। मई 2025 तक, MSME सेक्टर को दिए जाने वाले लोन में 14.1% की सालाना वृद्धि देखी गई है, जो इस सेक्टर की बढ़ती अहमियत को दर्शाता है। हालांकि, बिना गारंटी के लोन बढ़ने से बैंकों की एसेट क्वालिटी (संपत्ति की गुणवत्ता) पर नजर रखने की जरूरत होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी, क्रेडिट गारंटी स्कीमें MSME फाइनेंसिंग को बढ़ावा देने का एक आजमाया हुआ तरीका है। RBI का यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था के जमीनी स्तर पर विकास को बढ़ावा देने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने का एक बड़ा प्रयास है।