भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) विदेशी व्यापार में लोकल करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की वकालत कर रहा है। RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन का मानना है कि इससे ट्रांजेक्शन कॉस्ट कम होगी और करेंसी रिस्क भी घटेगा। देश के फॉरेक्स रिजर्व में **$691 अरब** की मजबूती के साथ, केंद्रीय बैंक लॉन्ग-टर्म मार्केट इवोल्यूशन और डिजिटल इंटीग्रेशन पर फोकस कर रहा है। RBI ने अनधिकृत ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कड़ी चेतावनी भी जारी की है।
विदेशी व्यापार में रुपये का बढ़ता दबदबा
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लोकल करेंसी के उपयोग को बढ़ाने के लिए एक बड़ी पहल कर रहा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य ट्रांजेक्शन के खर्चों को कम करना और करेंसी के उतार-चढ़ाव से जुड़े जोखिमों को घटाना है। हाल ही में फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FEDAI) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने इस बात पर जोर दिया कि व्यापारिक सेटलमेंट की एफिशिएंसी बढ़ाने के लिए यह बदलाव जरूरी है।
स्पेशल रुपी वोस्ट्रो अकाउंट (SRVA) फ्रेमवर्क
इस पहल के केंद्र में स्पेशल रुपी वोस्ट्रो अकाउंट (SRVA) फ्रेमवर्क है। यह सिस्टम भारतीय व्यवसायों को अमेरिकी डॉलर जैसी प्रमुख विदेशी मुद्राओं पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय, रुपये में इनवॉइस बनाने, भुगतान करने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सौदों को निपटाने की अनुमति देता है। इससे व्यवसायों के लिए कन्वर्जन कॉस्ट कम हो सकती है और पेमेंट प्रोसेस स्ट्रीमलाइन हो सकता है, बशर्ते इस सिस्टम को व्यावसायिक स्वीकृति मिले।
मजबूत फॉरेक्स रिजर्व और मार्केट
लोकल करेंसी के इस्तेमाल को बढ़ावा देने का यह कदम देश की मजबूत वित्तीय स्थिति के बीच उठाया गया है। भारत का फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व काफी बढ़ गया है, जो 2026 तक लगभग $691 अरब के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, घरेलू फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में स्पॉट और डेरिवेटिव्स को मिलाकर औसत डेली टर्नओवर लगभग $80 अरब तक पहुंच गया है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि मार्केट जटिल अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है।
छोटे व्यवसायों के लिए नई राह
इस विकास के बावजूद, RBI ने कुछ ऐसे क्षेत्रों को भी उजागर किया है जिनमें सुधार की आवश्यकता है। जैन ने बताया कि पब्लिक सेक्टर बैंकों को फॉरेक्स डेरिवेटिव्स मार्केट में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की जरूरत है। खासकर, छोटे व्यवसायों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को करेंसी जोखिमों से निपटने में मदद करने में उनकी भूमिका अहम होगी। वर्तमान में, उनकी भागीदारी उनके कुल बैलेंस शीट के आकार की तुलना में कम मानी जाती है, जिससे बड़े शहरों के बाहर की छोटी फर्मों के लिए विकल्प सीमित हो जाते हैं।
अनधिकृत प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ सख्त चेतावनी
RBI ने निवेशकों और बाजार सहभागियों को अनधिकृत ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स के बारे में भी आगाह किया है। केंद्रीय बैंक ने देखा है कि फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों के बाहर काम करने वाली कई एंटिटीज बढ़ रही हैं। ये प्लेटफॉर्म अक्सर ऊंचे रिटर्न या आसान पहुंच के वादे करके ग्राहकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन उचित प्राधिकरण के बिना काम करते हैं, जिससे व्यक्तिगत निवेशकों को धोखाधड़ी का खतरा होता है। RBI ने बैंकों और ग्राहकों दोनों को सतर्क रहने और ऐसे अनधिकृत चैनलों से बचने की सलाह दी है।
भविष्य की ओर डिजिटल कदम
आगे बढ़ते हुए, RBI को उम्मीद है कि फॉरेन एक्सचेंज मार्केट तेजी से डिजिटल होगा। ट्रांजेक्शन की शुरुआत से लेकर फाइनल रिपोर्टिंग तक, पूरी प्रक्रिया के पूरी तरह से पेपरलेस होने की उम्मीद है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का इंटीग्रेशन एनोमली डिटेक्ट करने और डॉक्यूमेंट्स को क्लासिफाई करने जैसे कामों में बड़ी भूमिका निभाएगा। निवेशकों और हितधारकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि बैंक इन तकनीकों को कितनी जल्दी अपनाते हैं और विभिन्न क्षेत्रों में वास्तविक व्यापार मात्रा में SRVA फ्रेमवर्क को कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है।
